हज़ारों मुंतज़री को अलविदा कहने पहुँचे

ईरान के सर्वाधिक प्रतिष्ठित विपक्षी नेता आयतुल्ला हुसैन अली मुंतज़री को अंतिम विदाई देने के लिए हज़ारों की तादाद में शोकाकुल और विपक्ष के समर्थक लोग इकट्ठा हो रहे हैं.

मुंतज़री का रविवार को निधन हो गया था. ईरान के सर्वाधिक प्रतिष्ठित शिया नेताओं में से एक मुंतज़री, वर्तमान राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के विरोध करने वालों में अगली पंक्ति में थे.

मुंतज़री ने इस साल ईरान में हुए राष्ट्रपति चुनाव में महमूद अहमदीनेजाद की जीत को धांधली बताया था और चेतावनी दी थी कि ईरान धीरे-धीरे तानशाही बनने की दिशा में जा रहा है.

उनकी मृत्यु की ख़बर आने के बाद ईरान में विपक्ष ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे मुंतज़री के जनाज़े में बड़ी संख्या में शामिल हों.

मुंतज़री की मौत की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में विपक्ष समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं. मुंतज़री के शहर क़ोम में उनके समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं.

शोक का 'दमन'

उधर ईरान की सरकार ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को इस अंतिम संस्कार की रिपोर्टिंग करने से रोक दिया है.

कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की ख़बरें आ रही हैं और कई स्थानों पर शोक व्यक्त करने और अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे लोगों को रोकने की भी बात सामने आ रही है.

यहाँ तक कि इंटरनेट के इस्तेमाल को भी रोक दिया गया है.

Image caption जानकारों का कहना है कि मुंतज़री की अंतिम विदाई के ज़रिए विपक्ष एकजुट हो सकता है

बीबीसी फ़ारसी टीवी के प्रसारण को रोकने की भी कोशिशें की गई हैं. हालांकि बीबीसी का कहना है कि उनकी लोगों तक समाचार पहुंचाने की हरसंभव कोशिश जारी रहेगी.

मुंतज़री की मौत के कुछ घंटों के बाद व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी करके कहा है कि वे सबके अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए अपनी प्रतिबद्धता के कारण उनका सम्मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर था.

स्थिति तनावपूर्ण

बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि मुंतज़री की मौत की घोषणा से ईरान में नया तनाव पैदा हो गया है.

मुंतज़री 87 वर्ष के थे और उनके बेटे के मुताबिक़ उनकी मौत प्राकृतिक थी.

ईरानी नेतृत्व की खुली आलोचना के कारण चर्चित मुंतज़री ने अहमदीनेजाद के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने पर भी सवाल उठाया था.

उन्होंने देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्ला अली ख़ामनेई की वैधता पर भी सवाल उठा दिए थे.

मुंतज़री के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने की संभावना है. इसे देखते हुए मीडिया पर अतिरिक्त पाबंदियाँ लगाई गई हैं और सरकारी सेना को अलर्ट रहने को कहा गया है.

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