'कोपेनहेगन समझौता ठीक लेकिन अपर्याप्त'

  • 23 दिसंबर 2009
जलवायु परिवर्तन
Image caption कोपेनहेगेन में हाल ही में जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन हुआ

जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल के अध्यक्ष और पर्यावरणविद आरके पचौरी ने का कहना है कि कोपेनहेगन में हुआ समझौता संतोषजनक ज़रूर है लेकिन पर्याप्त नहीं है.

नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में आरके पचौरी ने कहा, ‘कुल मिलाकर मैं यही कहना चाहूंगा कि कोपेनहेगन में जो परिणाम निकला उसे अच्छा कहा जा सकता है. हां ये पर्याप्त हल नहीं है. लेकिन इससे दुनिया को ये सीख भी मिली है कि इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है और किसी बाध्यकारी समझौते के बारे में सोचना होगा.’

उनका कहना था कि कार्बन उत्सर्जन 2015 तक की अधिकतम सीमा से ज़्यादा न बढ़ने पाए इसके लिए दुनिया भर के देशों को अभी से प्रयास करने होंगे.

आरके पचौरी ने अमरीका के उस दावे का भी खंडन किया, जिसमें उसने जलवायु परिवर्तन पर भारत के घरेलू उपायों को चुनौती देने की बात कही है.

पचौरी ने कहा, ''कोई भी देश भारत के घरेलू उपायों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता.समझौते में ऐसा अधिकार किसी को भी नहीं दिया गया है. दरअसल अमरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सहयोगी सीनेट में यह जताना चाहते हैं कि वो वक्त पड़ने पर भारत व चीन पर दबाव बना सकते हैं.''

उनका कहना था कि भारत पर कोई दबाव नहीं है. अन्यथा भारत जलवायु से जुड़े निरीक्षण व सत्यापन संबंधी प्रावधानों को नहीं नकारता.

आरके पचौरी ने ब्रिटिश अख़बार टेलीग्राफ में छपी उन ख़बरों का भी खंडन किया जिसमें आरोप लगाया गया है कि वो और उनकी संस्था कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए काम करते हैं.

उन्होंने कहा कि ये एक सामान्य बात है कि जब भी कोई कार्यक्रम पूर्णरुपेण सफल नहीं हो पाता तो कुछ लोग आरोप लगाने लगते हैं.

उन्होंने कहा कि मैं टेरी का पूर्ण कालिक कर्मचारी हूं और इसी संस्था के लिए काम करता हूं. जो भी पैसा यहां आता है वो इस संस्था का होता है और इन सब की नियमित रूप से जांच कराई जाती है.

टेलीग्राफ अख़बार ने ये भी आरोप लगाया था कि आरके पचौरी की संस्था टेरी अपने बैंक खातों को कभी सार्वजनिक नहीं करती है.

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