चिंपांज़ी औज़ार से काटते हैं अपना भोजन

चिंपांज़ी
Image caption औज़ारों से फल तोड़ते चिंपांज़ी

पहली बार ये बात देखने में आई है कि चिंपांज़ी अपने भोजन को छोटे छोटे टुकड़ों में काटने के लिए औज़ारों का इस्तेमाल करते हैं.

जापान के क्योटो विश्वविद्यालय के प्राइमेट रिसर्ट इंस्टीट्यूट के प्रोफैसर विलियम मैक्ग्र्यू और प्रोफैसर मात्सुज़ावा के साथ ब्रिटन के केंब्रिज विश्वविद्यालय की शोध छात्रा कैथलीन कूप्स ने चिंपांज़ियों के व्यवहार पर ये अध्धययन किया जिसके नतीजे प्राइमेट पत्रिका मे छपे हैं

इस अध्धययन मे बताया गया है कि अफ्रीकी देश गिनी में निंबा पहाड़ों पर रह रहे चिंपांज़ी सख़्त क़िस्म के फलों को काटने के लिए पत्थरों और कुल्हाड़ी जैसे आकार वाली लकड़ी वग़ैरह की मदद लेते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि चिंपांज़ी न केवल औज़ारों से फलों को काटते हैं बल्कि अपने भोजन को बराबर के चबाने लायक टुकड़ों में काटते भी है.

प्रोफैसर विलियम मैक्ग्र्यू ने बताया कि निंबा पहाड़ो पर रहने वाले इन चिंपांज़ियों के व्यवहार का अध्ययन करके बताया कि ये बंदर बड़े सुनियोजित ढंग से औज़ारों का इस्तेमाल करते है.

कैथलीन कूप्स का कहना है, “अफ्रीका में चिंपांज़ी अपने खाने के जुगाड़ के लिए अलग अलग तरीक़े के औज़ारों का इस्तमाल करते हैं. चिंपांज़ियों के कुछ समूह मेवा जैसे सूखे फलों को तोड़ने के लिए पत्थर का कुल्हाड़ी और संदान की तरह इस्तेमाल करते है, जबकि कुछ अन्य समूह कीड़े मकोड़ों के शिकार के लिए पेड़ो की टहनियों का सहारा लेते हैं. ”

अपने एक महीने के इस अध्ययन के दौरान कैथलीन कूप्स ने वे पत्थर और चट्टानों के टुकड़े भी देखे जिनका इस्तामल वहां के चिंपांज़ी ट्रेकुलिया जैसे सख़्त फल को तोड़ने के लिए कर चुके थे. इन औज़ारों पर फलों के अवशेष और उनके बीज आदि भी चिपके हुए थे.

ये फल वॉलीबॉल के आकार के होते हैं, जिनके अंदर के गूदे तक पहुंच पाना चिंपांज़ियो के लिए मुश्किल होता है.

शोध से स्पष्ट हुआ है कि फलों को पत्थर पर पटकने के बजाए चिंपांज़ी उन्हें पत्थर से तोड़ना ज्यादा पसंद करते थे.

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