चीन में विरोध के लिए सज़ा

  • 25 दिसंबर 2009
लिउ ज़ियाओबाओ
Image caption लिउ ज़ियाओबाओ ने चीन में राजनीतिक आज़ादी की वकालत की थी

चीन में सरकार के सबसे बड़े विरोधी माने जाने वाले लिउ ज़ियाओबाओ को सरकार के ख़िलाफ़ गंभीर षडयंत्र रचने के आरोप में 11 वर्ष जेल की सज़ा सुनाई गई है.

लिउ ज़ियाओबाओ एक ऐसे दस्तावेज़ के सह लेखक थे जिसमें कहा गया था कि चीन में बड़े राजनीतिक सुधारों की ज़रुरत है. इसी के आधार पर उन पर मुक़दमा चलाया गया था.

यूरोपीय संघ, अमरीका और मानवाधिकार संगठनों ने इस मामले की निंदा करते हुए कहा था कि राजनीतिक विद्वेष के कारण मुक़दमा चलाया जा रहा है. लेकिन चीन ने इसे हस्तक्षेप क़रार दिया था.

बुधवार को जब मामले की सुनवाई शुरु हुई तो पश्चिमी देशों के राजनयिकों और पत्रकारों को अदालत में नहीं जाने दिया गया.

बीजिंग में बीबीसी संवाददाता माइकल ब्रिस्टोव का कहना है कि इस सज़ा से यह ज़ाहिर हुआ है कि चीन की सरकार नहीं चाहती कि उनकी सत्ता को कोई चुनौती दे.

लिउ ज़ियाओबाओ की पत्नी लिउ ज़िया ने पत्रकारों से कहा, "फ़िलहाल मैं सिर्फ़ इतना बता सकती हूँ कि ग्यारह साल की सज़ा हुई है."

जबकि राजनयिकों को लिउ के वकीलों ने बताया है कि उन्हें दो और सालों के लिए राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखने का फ़ैसला हुआ है.

प्रतिक्रिया

इस फ़ैसले पर अमरीका की ओर से तुरंत प्रतिक्रिया आई है.

चीन में अमरीकी दूतावास के अधिकारी ग्रेगरी मे ने अदालत परिसर में कहा, "हम चीन सरकार से कहते रहेंगे कि उन्हें रिहा किया जाए और चीन के सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान किया जाए जिसमें वे अपने राजनीतिक विचार प्रकट कर सकें."

ग्रेगरी मे उन कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय देशों के राजनयिकों में से थे जिन्हें अदालत में जाने से रोक दिया गया.

इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि दूतावासों से जो बयान आ रहे हैं वे चीन के अंदरुनी मामलों में दखल का मामला है.

लिउ ज़ियाओबाओ एक लेखक हैं और वे एक यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर भी रहे हैं. वे वर्ष 2008 से जेल में.

वे 'चार्टर-08' नाम के दस्तावेज के सह लेखक रहे हैं.

इस दस्तावेज़ में कहा गया था कि चीन में व्यापक प्रजातांत्रिक राजनीतिक सुधारों और स्वतंत्रता दिए जाने की ज़रुरत है, जिसमें कम्युनिस्टों की एक पार्टी शासन को समाप्त करना भी शामिल है.

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