रोहिंग्या मुसलमानों की बर्मा वापसी

Image caption बांगलादेश में शरर्णार्थी शिविरों में रह रहे रोहिंग्या मुसलमान

बांगलादेश की सरकार का कहना है कि बर्मा 9,000 रोहिंग्या मुसलमानों को वापस लेने को तैयार हो गया है.

बांगलादेश के विदेश सचिव मोहम्मद मिजारुल क़ायस ने बर्मा के विदेश सचिव मउंग म्यिन्त के साथ हुई बैठक के बाद राजधानी ढाका में यह घोषणा की.

दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच व्यापार समझौतों और समुद्री सीमाओं पर भी बातचीत होने की आशा है.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि रोहिंग्या मुसलमान वापस नहीं जाना चाहते क्योंकि वो धार्मिक उत्पीड़न के कारण बर्मा से भागे थे.

बहुतों के पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है और बहुत बदहाली में जीवन काट रह रहे हैं.

बर्मा ने बांगलादेश को आश्वासन दिया है कि वह प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्दी से जल्दी शुरु करेगा.

उत्पीड़न से भागे

बांगलादेश के विदेश सचिव मोहम्मद मिजारुल क़ायस ने कहा कि बांगलादेश ने बर्मा को 28,000 रोहिंग्या मुसलमानों की सूची दी थी जिसमें से बर्मा ने 9,000 को अपना नागरिक स्वीकार किया.

बांगलादेश का कहना है कि देश के दक्षिण पूर्व में बने दो सरकारी शरणार्थी शिविरों में कोई 30,000 रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं और कोई तीन लाख अवैध रूप से देश के अलग अलग हिस्सों में रह रहे हैं.

रोहिंग्या मुसलमानों की यह समस्या 30 साल पुरानी है लेकिन इस घोषणा से इसका आंशिक हल निकल आया है.

रोहिंग्या मुसलमानों ने 1970 के दशक के अंत में बर्मा से पलायन शुरु किया था. लेकिन भारी संख्या में पलायन 1992 में हुआ जब कोई 250,000 लोग बांगलादेश भाग आए थे.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बर्मा की सैनिक सरकार रोहिंग्या मुसलमानों के साथ भेदभाव बरतती है. उन्हे आवाजाही की आज़ादी नहीं और न शिक्षा और रोज़गार के अवसर हैं.

इस साल के शुरु में रोहिंग्या शर्णार्थियों ने थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे अन्य एशियाई देशों में शरण लेने की कोशिश की थी.

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