ईरान में सरकार समर्थक उतरे सड़कों पर

ईरान में प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ॉटो)
Image caption ईरान में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे

ईरान में हाल ही में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों की प्रतिक्रिया में अनेक शहरों में अब सरकार के समर्थन में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.

हालांकि इनकी संख्या कितनी है कि इसकी कोई पुष्ट सूचना नहीं है लेकिन ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर जो तस्वीरें आ रही हैं, उससे पता चलता है कि सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा सकती है.

ईरानी अधिकारियों ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया है कि वो देश में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के लिए विपक्षी दलों के लोगों को भड़का रहे हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक सरकार समर्थित इन प्रदर्शनों में देश भर में लाखों लोग शामिल हो रहे हैं. वहीं ईरान के पुलिस प्रमुख जनरल इस्माइल अहमदी मुग़द्दम ने चेतावनी दी है कि सरकार विरोधी लोगों के खिलाफ़ कड़े क़दम उठाए जाएंगे. उनका कहना था, ''हल्की कार्रवाई का समय अब ख़त्म हो चुका है. मैं ये बात पहले भी कह चुका हूं लेकिन वो समझते हैं कि मैं मज़ाक कर रहा हूं. लेकिन अब जो भी व्यक्ति इन प्रदर्शनों में शामिल पाया जाएगा या फिर विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त होगा, उनके ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने में हम नहीं हिचकेंगे.''

सरकार समर्थित एक रैली को संबोधित करते हुए ईरान के धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली ख़मेनेई के एक प्रतिनिधि मोहम्मद अलम अल होदा ने कहा कि विपक्षी नेता ''खुदा के दुश्मन'' हैं और उन्हें देश के शरिया क़ानून के मुताबिक वही सज़ा मिलनी चाहिए जो कि ख़ुदा के दुश्मनों को मिलती है

प्रदर्शनकारी एक स्वर में सरकार समर्थक नारे लगा रहे थे.

ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर तेहरान में हो रहे प्रदर्शन की जो तस्वीरें दिख रही हैं, उनमें लोग अमरीका, इसराइल और ब्रिटेन के अलावा विपक्षी संगठन मोजाहिदीने ख़ल्क़ के विरोध में नारेबाज़ी कर रहे थे. सरकार ने हाल में विपक्ष की ओर से हुए कई प्रदर्शनों के जवाब में यह रैली आयोजित की थी, जिन्हें सुरक्षा सैनिकों ने तितर बितर किया था.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन रविवार को शिया मुसलमानों के पवित्र धार्मिक त्योहार अशूरा मनाए जाने के दौरान अपनी चरम सीमा पर थे.

रविवार को ऐसे ही एक प्रदर्शन में आठ लोग पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए थे. इनमें प्रमुख विपक्षी नेता मीरहुसैन मुसावी का भतीजा भी शामिल था.

बताया जा रहा है कि उन्हें सुरक्षा बलों ने मारने की कथित धमकी दी थी और उन पर कड़ी नज़र रखी जा रही थी.

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