शत्रुता का अंत हो: उत्तर कोरिया

  • 1 जनवरी 2010
उत्तर कोरिया
Image caption उत्तर कोरिया परमाणु मुद्दे पर छह दलों की बातचीत से पिछली अप्रैल में अलग हुआ था

उत्तर कोरिया ने अपने नववर्ष के संदेश में अमरीका के साथ रिश्तों में शत्रुता के अंत और कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति का आहवान किया है.

ये विचार देश के प्रमुख समाचार पत्रों में एक बयान के ज़रिए व्यक्त किए गए हैं.

इसके जवाब में अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि उत्तर कोरिया अपने नेक इरादे परमाणु मुद्दे पर छह दलों की बातचीत में दोबारा भाग लेकर ज़ाहिर करे.

हर साल देश के तीन प्रमुख अख़बारों में एक संयुक्त संपादकीय के ज़रिए उत्तर कोरिया पारंपरिक तरीके से अपनी भावी नीतियों के बारे में उल्लेख करता है.

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उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी का कहना है कि ऐसा ऐशिया में स्थिरता और शांति के लिए ज़रूरी है.

उत्तर कोरिया ने ये इच्छा भी जताई है कि कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारो से मुक्त क्षेत्र बनाया जाए.

इस साल दिसंबर में उत्तर कोरिया ने कहा था कि प्यॉंगयांग भेजे गए अमरीका के विशेष दूत के साथ बातचीत में दोनों पक्षों के बीच मतभेद ख़ासे घटे थे. ये मतभेद उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे पर छह दलों के बीच बातचीत में दोबारा भाग लेने के मुद्दे पर थे.

देश की सरकारी समाचार एजेंसी के ज़रिए संपादकीय में कहा गया है - "कोरियाई प्रायद्वीप और एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता बनाने के मूल काम के लिए यह ज़रूरी है कि उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच शत्रुता के रिश्ते को ख़त्म किया जाए. उत्तर कोरिया की ये लंबे समय से चली आ रही नीति है कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति कायम की जाए और बातचीत और चर्चा के ज़रिए इसे परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाया जाए."

उधर अमरीकी विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने पहचान न बताए जाने की शर्त पर कहा, "काम शब्दों से कहीं अधिक बयान करते हैं...एक अच्छा क़दम ये होगा कि (उत्तर कोरिया) छह दलों की बातचीत में दोबारा शामिल हो."

पिछले साल अप्रैल में उत्तर कोरिया इस बातचीत से अलग हो गया था जब उसके लंबी दूरी के मिसाइल के प्रक्षेपण की व्यापक निंदा हुई थी. इसके बाद मई में उसके परमाणु परीक्षण की भी निंदा हुई थी और संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंध भी लगाए थे.

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