यमन के विद्रोहियों को समर्थन

सोमालिया
Image caption सोमालिया के चपमपंथी यमन जा सकते हैं

सोमालिया के कट्टरपंथी इस्लामी गुट अल शाबाब ने घोषणा की है कि वो यमन में इस्लामी विद्रोहियों की लड़ाई के समर्थन में अपने लड़ाके भेजेगा.

अल शाबाब गुट के एक वरिष्ठ अधिकारी शेख मुख़्तार अबू रोबू मंसूर ने ये घोषणा सोमालिया की राजधानी मोगादिशु के ठीक बाहर हुई एक रैली में की. इस रैली में अल शाबाब के सैकड़ों नए लड़ाकों ने परेड किया जिन्हें हाल ही में प्रशिक्षण मिला है.

शेख मुख़्तार अबू रोबू मंसूर ने इन लड़ाकों को संबोधित किया. यमन की सरकार का जो इस्लामी विद्रोही विरोध कर रहे हैं, उनके प्रति अबू रोबू मंसूर ने समर्थन जताया.

अबू मंसूर ने कहा," हमारे आने की तैयारी करो."

मोगादिशु की गलियों में भी अल शादाब के लड़ाकों ने परेड किया. इन लड़ाकों ने अपना प्रशिक्षण सोमालिया के दक्षिण के प्रशिक्षण शिविर में पूरा किया है.

इन नए लड़ाकों ने अपने चेहरे ढँके हुए थे और अरबी में नारे लगा रहे थे. उनके पीछे हथियार और मशीन गन से लदे ट्रक थे.

अपील

शेख अबू मंसूर ने यमन के इस्लामी विद्रोहियों से कहा कि वो सोमालिया के लड़ाकों के लिए मंच तैयार करें-वो मंच जहाँ से उनकी मदद के लिए आ रहे सोमालिया के लड़ाके अपनी कार्रवाई कर सकें.

अल-शाबाब ने अल क़ायदा के प्रति अपनी वफ़ादारी ज़ाहिर की है और ये गुट सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र के समर्थनवाली कमज़ोर सरकार को हटाने की लड़ाई लड़ रहा है.

यमन पहले से ही संकट से जूझ रहा है. वहाँ के अधिकारी अल क़ायदा के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं और अमरीका ने यमन की सरकार के समर्थन के लिए सैन्य समर्थन बढ़ा दिया है.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि ऐसे में अगर अल-शाबाब अपने लड़ाके भेजेगा तो वहाँ पहले से जटिल हुई पड़ी समस्या और भी गहरी हो जाएगी.

इस बीच यमन में किस तरह से इस्लामी कट्टरपंथ से निपटा जाए, इस विषय पर चर्चा के लिए ब्रिटेन ने लंदन में एक अंतरराष्ट्रीय बैठक बुलाई है.

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