साइबर हमले और पारंपरिक युद्ध तकनीक

ब्रितानी सैनिक
Image caption भारी हथियारों के साथ ब्रितानी सैनिक

ब्रिटेन के नए सेना प्रमुख का कहना है कि युद्ध के पारंपरिक तरीक़े 21वीं सदी में बड़ी तेज़ी से पुराने पड़ते जा रहे हैं.

एक ब्रितानी अख़बार को दिए इंटरव्यू में ब्रिटेन के सेना प्रमुख जनरल डेविड रिचर्डस ने कहा है कि 21वीं सदी के बदलावों के साथ-साथ युद्ध की तकनीक और तरीक़ों में भी बदलाव लाना ज़रूरी है.

जनरल रिचर्ड्स ने कहा कि आज की दुनिया में युद्ध का स्वरूप ही बदल चुका है इसलिए ब्रितानी सेना को बड़े और विशाल हथियारों की अब उतनी ज़रूरत नहीं है, जितनी नई युद्ध तकनीक अपनाने की है.

जनरल रिचर्ड्स का कहना था कि इराक और अफ़ग़ानिस्तान के युद्ध के दौरान ये देखा गया है कि सुनियोजित तरीके से गठित कोई भी गुट अपने सस्ते और हल्के हथियारों के साथ भी सेना के लिए एक बड़ा ख़तरा बन सकता है.

उनका कहना था कि इसके अलावा साइबर हमले भी प्रशासनों और सरकारों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनते जा रहे हैं.

जनरल रिचर्ड़्स ने कहा कि इस तरह के ख़तरों से निपटने के लिए ब्रितानी सेना को बड़े-बड़े जहाज़ों और लड़ाकू विमानों की ज़रूरत नहीं है, बल्कि सैनिकों की संख्या बढ़ाने की ज़रूरत है.

उनका कहना था कि हेलिकॉप्टरों, मानव रहित ड्रोन विमानों और मज़बूत कंप्यूटर प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद से इन ख़तरों से निपटा जा सकता है,

जनरल रिचर्ड्स का कहना था कि ये नई युद्ध तकनीक न केवल देश के भीतर विद्रोही अभियानों से निपटने के लिए बल्कि विदेशों से आने वाली धमकियों से निपटने में भी कारगर साबित होगी.

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