हेती में '50 हज़ार' लोगों के मारे जाने की आशंका

रेड क्रॉस का अनुमान है कि हेती के विनाशकारी भूकंप में 45 से 50 हज़ार लोग मारे गए. इधर जीवित लोगों के ढूंढ निकालने के लिए राहत और बचाव दल जुटे हुए हैं.

अमरीका राहत और बचाव कार्य में सहायता के लिए 3,500 सैनिक और 2,200 मैरीन भेज रहा है.

अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा का कहना था कि अमरीका अब तक सबसे बड़ा सहायता अभियान चलाने जा रहा है. उनका कहना था कि ज़रूरत के समय हेती की अनदेखी नहीं की जा सकती.

राहत और बचाव के लिए चीन, फ्रांस, स्पेन और अमरीका के दल पहुँच गए हैं.

बचाव कार्य में परेशानी पेश आ रही है क्योंकि स्थानीय बचाव दलों के पास भारी उपकरण नहीं हैं जिनसे मलबे को हटाया जा सके.

स्थानीय निवासी मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

वो खाली हाथों से बचाव कार्यों में लगे हैं. उन्होंने घायलों को अस्पताल पहुँचाया है और मृत लोगों को निकालकर कपडे़ ढककर सड़कों के किनारे रखा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कई देशों से सहायता पहुँचनी शुरू हो गई है लेकिन सुनियोजित राहत अभियान की कमी साफ़ नज़र आ रही है.

संवाददाता का कहना है कि अब मलबों से आवाज़ें आनी बंद हो गईं हैं और लोग घबराए हुए हैं.

इस भूकंप में हज़ारों लोगों के मारे जाने की आशंका है और लगभग 30 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.

रॉयटर समाचार एजेंसी के एक संवाददाता का कहना है कि एक अस्पताल के बाहर ही लगभग एक हज़ार लोगों के शव पड़े हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उससे जुड़े 36 लोग भूकंप में मारे गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बताया कि हेती में तैनात संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी मलबे में फंसे थे और वो जीवित पाए गए. उन्हें एक पाइप से पानी पहुँचाया गया और बाद में बचा लिया गया और अब वो अस्पताल में हैं. बान की मून ने इसे चमत्कार बताया.

मौत का तांडव

इसके पहले हेती के प्रधानमंत्री जीन मैक्स बेलेरिवे ने कहा था कि मंगलवार की शाम आए भूकंप में मरने वालों की संख्या एक लाख से अधिक हो सकती है.

इस भूकंप में हज़ारों के मारे जाने की आशंका है

दूसरी ओर राष्ट्रपति रेने प्रेवाल ने कहा है कि भूकंप से देश को 'अकल्पनीय नुक़सान' हुआ है.

रेडक्रॉस का कहना है कि भूकंप से तीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं.

हालांकि अभी तक स्पष्ट नही हुआ है कि इस भीषण भूकंप ने कितने लोगों की जान ली है क्योंकि राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है.

इस बीच पोर्ट-ओ-प्रिंस में हज़ारों लोग भूकंप के बाद की रात बिना छत गुज़ार रहे हैं.

इस बीच दुनिया भर के कई देशों से वहाँ सहायता और राहत सामग्री पहुँचनी शुरु हो गई है.

व्यापक तबाही

राष्ट्रपति रेने प्रेवाल ने कहा है कि राजधानी में संसद भवन नष्ट हो गया है, टैक्स कार्यालय, अस्पताल और स्कूल भवन नष्ट हो गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने शांति मिशन में काम करने वाले 16 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है.

इसके अलावा वहाँ रोमन कैथोलिक चर्च के आर्चबिशप की भी मौत हो गई है.

पोर्ट-ओ-प्रिंस की जेल की इमारत भी ध्वस्त हो गई है और ख़बरें हैं कि वहाँ से बहुत से क़ैदी फ़रार हो गए हैं.

सहायता कार्य

इस बीच राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहा है.

हेती में दुनिया के विभिन्न देशों से सहायता पहुँचनी शुरू हो गई है

इस बीच विश्व बैंक ने दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक हेती को दस करोड़ डॉलर की अतिरिक्त आपात सहायता देने की घोषणा की है.

अमरीका ने भी पूरी सहायता का आश्वासन दिया है.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीकी की ओर से पूरी सहायता की घोषणा करते हुए हेती के भूकंप को 'क्रूर और समझ से परे' बताया है.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स दोनों ने अपना दौरा कार्यक्रम रद्द कर दिया है और राहत-बचाव कार्य की निगरानी करने के लिए लौट रहे हैं.

इस बीच अंतरराष्ट्रीय विकास पर अमरीकी एजेंसी (यूएसएड) के राजीव शाह ने कहा है कि विशेषज्ञों का दल हेती रवाना किए जा चुके हैं.

रेडक्रॉस जिनेवा से एक राहत दल रवाना कर रहा है जबकि संयुक्त राष्ट्र खाद्य मिशन की ओर से दो विमानों में खाद्य सामग्री वहाँ भेजी जा रही है.

विनाशकारी भूकंप

भूकंप मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम चार बजकर 53 मिनट पर आया था.

हेती में ऐसा विनाशकारी भूकंप पहले कभी नहीं आया था

इसके बाद वहाँ दर्जन भर झटके और महसूस किए गए.

वैज्ञानिकों का कहना है कि सात की तीव्रता वाला यह भूकंप इसलिए इतना विनाशकारी साबित हुआ क्योंकि भूकंप का केंद्र भूतल से सिर्फ़ दस किलोमीटर नीचे स्थित था.

इससे धरती बुरी तरह से काँपी और ख़राब ढंग से बनी इमारतें इन झटकों को सह नहीं पाईं.

हालांकि हेती कई तरह की आपदाएँ झेलता रहा है कि लेकिन भूकंप के झटके वहाँ के लिए कोई आम घटना नहीं है.

वहाँ सौ साल में ऐसा कोई भूकंप नहीं आया था.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इन सालों में हेती के नीचे मौजूद 'फॉल्ट लाइन' में गतिविधियाँ चल रही थीं और 'टेक्टॉनिक प्लेटें' विपरीत दिशा में सरक रही थीं.

जब भूकंप आया तो वहाँ आसमान में धूल ही धूल दिखाई देने लगी और राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस में हर कोने से चीख़ने-चिल्लाने की आवाज़ें आती रहीं.

संवाददाताओं का कहना है कि अब ये आवाज़ें करुण रुदन में बदल चुकी हैं.

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