भारतीय को पीटने वाले को सज़ा

ऑस्ट्रेलिया में हमले के ख़िलाफ़ भारतीयों का विरोध
Image caption पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में भारतीय नितिन गर्ग की हत्या कर दी गई थी

ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को भारतीय मूल के एक टैक्सी ड्राइवर के साथ मार-पीट का दोषी पाया है और उसे तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई है.

ऑस्ट्रेलियाई नागरिक पॉल जॉन ब्रॉडेन पर आरोप लगा था कि गुरुवार देर रात उन्होंने बलार्ट शहर में एक 24 वर्षीय भारतीय टैक्सी ड्राइवर सतीश ताटीपामुला के साथ बदतमीज़ी की थी और उन्हें मारा-पीटा था. उन्हें मामूली चोटें आई हैं.

समाचार एजेंसियों के अनुसार हमलावर ने गाड़ी को भी नुक़सान पहुँचाया. घटना के बाद ब्रॉडेन को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

इसके बाद भारत सरकार ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार से अपना रोष जताया है. भारत की विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया की सरकार से भारतीयों पर हो रहे हमलों के दोषियों को कड़ी सज़ा देने का आग्रह किया है.

भारतीय मूल के टैक्सी ड्राइवर और पिछले दिनों एक गुरुद्वारे की परिसर में आग लगने की घटनाओं पर परनीत कौर ने आपत्ति जताई.

उनका कहना था, "ये घटनाएँ निराशाजनक है. पिछने दिनों एक गुरुद्वारे की परिसर में आग लगाई गई थी. मैं समझती हूँ कि किसी पूजा स्थल पर हमला नहीं किया जाना चाहिए था. मैं आशा करती हूँ कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार जो कह रही है उसे पूरे करेगी. इन मामलों में कार्रवाई होगी, अपराधी पकड़े जाएँगे और उन्हें सज़ा मिलेगी."

ताज़ा घटना

समाचार एजेंसियों के अनुसार शुक्रवार को बलार्ट के मेजिस्ट्रेट कोर्ट ने ब्रॉडेन को मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का दोषी पाया.

ऑस्ट्रेलिया के पुलिस प्रवक्ता का कहना है कि जब टैक्सी पर सवार मुसाफ़िर ने ड्राइवर के साथ बदतमीज़ी की तो ड्राइवर मदद के लिए बलार्ट सर्विस स्टेशन में घुस गया लेकिन मुसाफ़िर भी ड्राइवर का पीछा करते हुए सर्विस स्टेशन में दाख़िल हुआ और उसने उसके साथ मारपीट की थी.

दूसरी ओर ब्रॉडेन के वकील फ़िलिप लिंच का कहना था कि ब्रॉडेन ने ख़ासी शराब पी रखी थी और रात की घटना के बारे में उन्हें कुछ भी याद नहीं है.

अदालत के मजिस्ट्रेट मिचेल हॉडसन का कहना था, "कमज़ोर लोग जो समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हों, उनके साथ हिंसा, विशेषकर ड्राइवरों के साथ हिंसा को बर्दाशत नहीं किया जा सकता है."