सू ची की रिहाई के लिए सुनवाई

  • 18 जनवरी 2010
Image caption सू ची की रिहाई के लिए दुनिया भर में प्रदर्शन होते रहे हैं.

बर्मा के सुप्रीम कोर्ट में लोकतंत्रवादी नेता आंग सान सू ची की नज़रबंदी के ख़िलाफ़ एक आख़िरी अपील पर सुनवाई हो रही है.

पिछले अगस्त में सू ची की नज़रबंदी को 18 महीनों के लिए बढ़ा दिया गया था जब एक अमरीकी व्यक्ति ने झील के किनारे बने उनके घर तक तैर कर पहुंचने की कोशिश की थी.

इसके पहले उनकी रिहाई की एक अपील निचली अदालत में खारिज हो चुकी है.

बीबीसी की दक्षिणपूर्व एशिया संवाददाता रेचेल हार्वे का कहना है कि सू ची के वकील इस दलील के साथ आगे आ रहे हैं कि जिस क़ानून के तहत उनपर आरोप दाखिल किए गए वो संविधान ही बर्खास्त हो चुका है तो ऐसे में उस क़ानून के लागू होने का सवाल ही नही उठता.

सुनवाई से कुछ ही देर पहले बीबीसी से बात करते हुए उनके एक वकील ने कहा, ``अगर केवल क़ानूनी तौर पर देखा जाए तो जीत हमारी होनी चाहिए.''

लेकिन रंगून में मौजूद राजनयिकों का कहना है कि उनका ये आत्मविश्वास उम्मीद पर आधारित है संभावनाओं पर नहीं.

इस सुनवाई का फ़ैसला आने में कम से कम एक हफ़्ता लगेगा.

इस बीच आंग सान सू ची और बर्मा की फ़ौजी सरकार के एक सदस्य के बीच बैठक हुई है.

सू ची ने फ़ौजी हुकूमत के प्रमुख से सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है और बदले में बर्मा पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में छूट के लिए कोशिश करने का वादा किया है.

पहले ये प्रस्ताव चार महीने पहले पेश किया गया और फिर नवंबर में दोहराया गया लेकिन उसपर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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