पाक को ब्रिटिश सहायता में कटौती

  • 21 जनवरी 2010
ब्राउन
Image caption गोर्डन ब्राउन ने दिसंबर में पाकिस्तान को अतिरिक्त सहायता देने का वचन दिया था

ब्रिटेन सरकार पाउंड की क़ीमत गिरने के कारण पाकिस्तान को आतंकवाद की रोकथाम के लिए दी जाने वाली राशि में कटौती कर रही है.

एक ब्रिटिश मंत्री ने कहा है कि पाउंड की कीमत गिरने के कारण सरकार को इस सहायता में कटौती करनी पड़ रही है.

मगर इस कटौती की आलोचना हो रही है क्योंकि ये बयान आने के कुछ ही घंटे पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने विरोधाभासी बयान दिया था.

ब्राउन ने संसद में एक बयान देते हुए अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा पर होने वाली आतंकवादी गतिविधियों को पश्चिम के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बताया था.

अब ब्रिटेन के विपक्षी दल प्रधानमंत्री पर सांसदों के साथ छल करने का आरोप लगा रहे हैं और उनसे इस बारे में तत्काल बयान देने की माँग की है.

विपक्ष ने आतंकवाद की रोकथाम के मद में कटौती किए जाने के फ़ैसले को भी एक ग़लत फ़ैसला बताया है.

बयान और आलोचना

बुधवार को प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन ने संसद के निचले सदन में सांसदों के सामने आतंकवाद की रोकथाम के लिए लिए जाने वाले नए उपायों की जानकारी दी थी.

अपने बयान में उन्होंने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर की आतंकवादी गतिविधियाँ पश्चिम के लिए अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.

लेकिन प्रधानमंत्री के इस बयान के दो घंटे बाद ही ऊपरी सदन में विदेश मंत्रालय में अफ़्रीका मामलों की मंत्री ग्लेनिस किनॉक ने पाकिस्तान को दी जानेवाली सहायता में कटौती के बारे में बयान दिया.

उन्होंने कहा कि पाउंड की क़ीमत घटने के कारण विदेश मंत्रालय को इस वर्ष बजट में 11 करोड़ पाउंड की कमी की पूर्ति करनी है और इसके लिए कई मदों में कटौती की जा रही जिसमें पाकिस्तान को दी जानेवाली मदद कम करना भी शामिल है.

सरकार के इस फ़ैसले पर विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी के छाया विदेश मंत्रि विलियम हेग ने कहा,"पाकिस्तान में आतंकवाद-निरोधी कार्यक्रमों पर ख़र्च को केवल पाउंड की कीमत गिरने के कारण कम कर देना निश्चित रूप से एक प्रभावी विदेश नीति नहीं कही जा सकती".

गोर्डन ब्राउन ने दिसंबर में पाकिस्तान को आतंकवाद से लड़ने के लिए पाँच करोड़ पाउंड की अतिरिक्त सहायता देने का वचन दिया था और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से कहा था कि ये केवल पाकिस्तान ही नहीं बल्कि ब्रिटेन की भी लड़ाई है.

फ़िलहाल विदेश मंत्रालय ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि प्रधानमंत्री ने जिस अतिरिक्त सहायता का वचन दिया था, उससे कटौती की जाएगी या किसी और तरह की सहायता पर भी प्रभाव पड़ेगा.

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