जल्द ही तय होगी स्वैच्छिक कटौती

  • 24 जनवरी 2010
जयराम रमेश, भारत के पर्यावरण मंत्री
Image caption बेसिक देशों की बैठक मे भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने अपनी प्रतिबद्धता जताई

दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील चीन औऱ भारत के समूह बेसिक ने कार्बन उत्सर्जन में स्वैच्छिक कटौती की मात्रा तय करने की समय सीमा पर सहमति जताई है, लेकिन उनका कहना है कि इस मुद्दे पर किए गए वादे क़ानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है.

बेसिक के पर्यावरण मंत्रियों ने कहा कि स्वैच्छिक कटौती के लक्ष्यों के बारे मे संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पैनल को 31 जनवरी तक सूचना दे दी जाएगी.

कोपेनहेगन सम्मेलन में विकासशील देशों को अपने कार्बन उत्सर्जन में स्वैच्छिक कटौती की मात्रा तय करने के लिए 31 जनवरी 2010 की समय सीमा दी गई थी.

दिल्ली में दो दिवसीय बैठक के समापन के अवसर पर बेसिक देशों के पर्यावरण मंत्रियों ने कुछ और मुद्दों पर भी अपना रुख़ स्पष्ट करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है.

इस बयान में कहा गया है, "पर्यावरण मंत्री इस बात पर सहमत हुए हैं कि कार्बन उत्सर्जन में स्वैच्छिक कटौती की मात्रा तय करके जलवायु परिवर्तन पर बने संयुक्त राष्ट्र के पैनल को 31 जनवरी 2010 तक इसकी सूचना दे दी जाएगी."

बयान में इस बात को भी स्पष्ट किया गया कि दिसंबर में हुए कोपेनहेगन समझौते में विकासशील देशों ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के बारे में कोई ऐसे वादे नहीं किए थे, जो क़ानूनी तौर पर बाध्यकारी हों.

चारों पर्यावरण मंत्रियों ने ये भी कहा कि पिछले साल दिसंबर का कोपेनहेगन समझौता राजनीतिक था.

भारत का स्पष्टीकरण

इसी सिलसिले में भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने 31 जनवरी की समय सीमा पर सहमति जताई लेकिन साथ ही ज़ोर देकर उन्होंने ये भी कहा कि कि कोपेनहेगन सम्मेलन में क़ानूनी तौर पर बाध्य करने वाला कोई वादा नहीं किया गया है.

इस बैठक में विकास शील देशों के समूह जी-77 की उन आशंकाओं का भी समाधान किया गया, जिनमें कहा जा रहा था कि बेसिक देश केवल अपने हितों की ही बात करेंगे.

इस मुद्दे पर दक्षिण अफ्रीका की पर्यावरण मंत्री ब्युलेवा सौंजिका ने कहा कि बेसिक देश अपने हितों के साथ जी 77 के हितों का भी पूरा ख़याल रखेंगे.

संयुक्त वक्तव्य में पर्यावरण मंत्रियों ने ये भी कहा कि विकासशील देशों को विकसित देशों के साथ मिल कर ये कोशिशें करनी चाहिए, कि मैक्सिको सिटी में आगामी दिसंबर में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से क़ानूनी तौर पर बाध्यकारी समझौता हो सके.

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