'केमिकल अली' को फाँसी

केमिकल अली की ये तस्वीर इराक़ के सरकारी चैनल अल इराक़िया ने दिखाई है

इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के सहयोगी रहे अली हसन अल माजिद यानी केमिकल अली को फाँसी दे दी गई है.

इराक़ के एक सरकारी प्रवक्ता ने इसकी घोषणा की. सद्दाम हुसैन के चचेरे भाई 'केमिकल अली' को नरसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में चार बार मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

कुछ दिनों पहले ही कुर्द शहर हलबजा में वर्ष 1988 के गैस हमले के मामले में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

माना जाता है कि इस गैस हमले में पाँच हज़ार लोग मारे गए थे. 16 मार्च 1988 को इराक़ी जेट विमान घंटों तक हलबजा शहर पर ज़हरीली गैसों की बौछार करते रहे.

इस हमले के बाद ही अली हसन अल माजिद को केमिकल अली कहा जाने लगा.

जानकारी

केमिकल अली को फाँसी दिए जाने की जानकारी एक सरकारी बयान में दी गई. इस बयान में सरकारी प्रवक्ता अली अल दाबाग़ ने बताया कि फाँसी दिए जाते समय किसी तरह का शोर-शराबा नहीं हुआ.

वर्ष 2006 में सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के समय शोर-शराबे पर काफ़ी विवाद हुआ था. सद्दाम हुसैन को फाँसी दिए जाने के समय के फुटेज में लोगों को ख़ुशी में चिल्लाते और तालियाँ बजाते देखा गया था. जिस पर बहुत विवाद हुआ था.

केमिकल अली को पहली बार जून 2007 में फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी. मामला था कुर्दों के ख़िलाफ़ सैनिक अभियान का. ये अभियान फरवरी से अगस्त 1988 तक चला था.

दिसंबर 2008 में उन्हें एक बार फिर मौत की सज़ा सुनाई गई थी. इस बार मामला था वर्ष 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद शिया विद्रोह को दबाने में उनकी भूमिका का.

मार्च 2009 में उन्हें तीसरी बार मौत की सज़ा सुनाई गई. वर्ष 1999 में बग़दाद के सद्र सिटी ज़िले में शिया मुसलमानों की हत्या के मामले में उन्हें ये सज़ा मिली.

बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि केमिकल अली को पहली बार मौत की सज़ा सुनाए जाने के बाद ही फाँसी हो गई होती.

लेकिन इराक़ी कुर्दों के लिए यह महत्वपूर्ण था कि वे हलबजा हमले के मामले में उन्हें दोषी ठहराए जाते देख पाते.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि केमिकल अली को फाँसी दिए जाने के बाद इराक़ के शिया और कुर्द समुदाय को काफ़ी ख़ुशी या कम से कम राहत मिली होगी, जो उनके हाथों सर्वाधिक पीड़ित रहे.

मिश्रित प्रतिक्रिया

आम इराक़ियों ने केमिकल अली को फाँसी दिए जाने पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है.

Image caption केमिकल अली को चार बार फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी

केमिकल अली के गृहनगर तिकरित के एक निवासी का कहना था- मैं अली हसन अल माजिद की मौत पर इराक़ी जनता को सांत्वना देता हूँ. उन्हें गद्दारों और गुंडों ने मार डाला.

लेकिन बग़दाद में रहने वाले अली सुहैल ने कहा कि फाँसी दिया जाना न्यायसंगत था. उन्होंने कहा, "अली हसन अल माजिद ने बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की थी. उन्हें फाँसी दिया जाना चाहिए था."

हलबजा के एक निवासी ने कहा कि अली हसन अल माजिदी को फाँसी दिए जाने से वे काफ़ी ख़ुश हैं.

उन्होंने कहा, "हलबजा पर हुए हमले में मारे गए लोगों के हमारे जैसे परिजन यह सुनकर काफ़ी ख़ुश हैं कि अल माजिद को फाँसी दे दी गई है."

केमिकल अली को अगस्त 2003 में गिरफ़्तार किया गया था. मुक़दमे के दौरान उन्होंने अपने किसी भी काम पर पछतावा नहीं व्यक्त किया था. उन्होंने कहा था कि वे इराक़ी सुरक्षा के हित में काम कर रहे थे.

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