44 डीम्ड विश्वविद्यालयों को राहत

  • 25 जनवरी 2010
सुप्रमी कोर्ट
Image caption मामले की अगली सुनवाई आठ मार्च को होगी.

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने देश के 44 डीम्ड विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द करने पर फिलहाल रोक लगा दी है.

मानव संसाधन मंत्रालय ने 18 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक हलफ़नामे में 44 डीम्ड विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द करने की बात कही थी. ऐसा देश के सभी डीम्ड विश्वविद्यालयों के कामकाज की समीक्षा करने के लिए बनाई टंडन समिति की रिपोर्ट के आधार पर किया गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक देश के 130 में से 44 डीम्ड विश्वविद्यालय इस खास दर्जे के अयोग्य हैं, इन्हें पारिवारिक कारोबार की तरह चलाया जा रहा है और इनके पीछे कोई अकादमिक नज़िरया नहीं है.

डीम्ड विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द करने के लिए दायर याचिका की सुनवाई पर सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा है कि कोई भी फ़ैसला लेने से पहले वो सरकार की बनाई टंडन समिति की रिपोर्ट देखना चाहेंगे.

याचिकाकर्ता विप्लव शर्मा ने बताया, "फिलहाल डीम्ड यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द नहीं की जाएगी बल्कि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नोटिस देकर समिति की रिपोर्ट पर सफाई देने का मौका देने की बात भी कही है."

अदालत में इस याचिका की सुनवाई के दौरान कई डीम्ड विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. उन्होंने न्यायालय के फ़ैसले का स्वागत करते हुए अपने संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा पाने के योग्य होने के तर्क दिए.

हरिद्वार के गुरुकुल विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रोफ़ेसर स्वतंत्र कुमार ने कहा ,"यूजीसी की टीम हमारे विश्वविद्यालय में तीन दिनों तक रही और उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमें इस बेहतरीन विश्वविद्यालय पर गर्व है. फिर भी हमारा नाम इस सूची में आया. पर आज के फैसले के बाद हमें न्यायालय पर विश्वास है."

डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा उन संस्थानों को दिया जाता है जो आम संस्थानों से बेहतर शिक्षा देने के योग्य माने जाते हैं. इन संस्थानों को दाखिले, फीस, पाठ्यक्रम और परीक्षाओं के बारे में स्वायत्त नियम बनाने की छूट दी जाती है.

ये डीम्ड यूनिवर्सिटी किसी बड़े विश्वविद्यालय का ही हिस्सा होती हैं और इनमें पढ़ने वाले छात्रों को डिग्री दोनों में से किसी भी संस्थान से मिल सकती है.

डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मानव संसाधन मंत्रालय का उच्च शिक्षा विभाग, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन से परामर्श के बाद दिया जाता है. इस याचिका की सुनवाई के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने अब अगली तारीख आठ मार्च निर्धारित की है.

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