चीन, भारत से पिछड़ना नहीं चाहते: ओबामा

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Image caption ओबामा ने कहा कि अर्थव्यवस्था पटरी पा आ रही है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राष्ट्र को अपने संबोधन में कहा कि चीन, जर्मनी और भारत बुनियादी ढांचे, स्वच्छ ऊर्जा और शिक्षा पर ज़ोर दे रहे हैं और अमरीका इनसे पिछड़ना नहीं चाहता.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि 2010 में वो नौकरियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे और इसके लिए गुरुवार को ही एक विधेयक पेश किया जाएगा.

ओबामा ने कहा कि वो अगले पाँच वर्षों में अमरीकी निर्यात का लक्ष्य निर्धारित करने जा रहा हैं. इससे अमरीका में 20 लाख नौकरियाँ बढ़ेंगी.

उन्होंने स्पष्ट किया कि वो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के प्रयासों के प्रति वचनबद्ध हैं.

ओबामा ने कहा कि वो बजट घाटे को कम करने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि 2011 से सरकारी खर्च की सीमा तय कर दी जाएगी.

उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में भी व्यापक सुधार की भी बात कही.

राष्ट्रपति ओबामा के भाषण का अधिकतर हिस्सा अमरीका की घरेलू समस्याओं पर केंद्रित था. अपने भाषण के अंत में वो विदेश नीति पर बोले.

इसके पहले कांग्रेस में उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया.

उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत ये कह कर करी कि इस कठिन समय में अमरीका की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी बनती है.

उनका कहना था कि अमरीकी लोग राजनीतिक मुश्किलों में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के संयुक्त प्रयासों की उम्मीद करते हैं.

अर्थव्यवस्था में सुधार

ओबामा ने कहा कि वो जानते हैं कि मुश्कलों में घिरे बैंकों को आर्थिक मदद अलोकप्रिय कदम था लेकिन वित्तीय प्रणाली को स्थिर करने के लिए ये ज़रूरी था.

उनका कहना था कि इसके बिना बेरोज़गारी दोगुनी हो जाती और इससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ जातीं.

उनका लोगों में समर्थन घटता जा रहा है और ये कदम उसे वापस हासिल करने की कोशिश माना जा रहा है.

उन्होंने भारत, जर्मनी और चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये देश अर्थव्यवस्था के संकट के दौर में भी हाथ पर हाथ धर के नहीं बैठे हैं और वे बुनियादी ढांचे पर निवेश कर उसे सुदृढ़ कर रहे हैं, ऐसे में अमरीका दूसरे स्थान पर नहीं बना रहना चाहेगा.

बराक ओबामा ने बड़े बैंकों की गतिविधियों की सीमाएँ निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण नए नियमों का उल्लेख किया.

भविष्य में किसी भी तरह के वित्तीय संकट को रोकने के मक़सद से राष्ट्रपति ओबामा ने बैंकों के फैले हुए व्यवसाय को सीमित करने और वित्तीय जोखिम उठाने की क्षमता को घटाने के लिए प्रस्ताव के बारे में बताया.

उनका कहना था कि जिन बैंकों को करदाताओं के पैसे से बचाया गया है, उनसे ये रकम वापस ली जाएगी.

विदेश नीति

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अमरीका को सबसे बड़ा ख़तरा परमाणु हथियारों से है.

उनका कहना था कि उत्तरी कोरिया को अलग थलग करने की कूटनीतिक कोशिशें तेज़ हुईं हैं.

ओबामा ने कहा कि ईरान यदि अपनी जवाबदेही की अनदेखी करना जारी रखता है तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ाई जाएगी, साथ ही अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षाबलों को प्रशिक्षित किया जाएगा.

उनका कहना था कि जुलाई, 2011 में अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को आगे आना होगा, इस दौरान अमरीकी सेनाओं की वापसी शुरू होगी.

राष्ट्रपति ओबामा ने स्पष्ट किया कि अगस्त के अंत तक सभी अमरीकी सैनिक इराक़ छोड़ देंगे.

साथ ही उन्होंने कहा कि इराक़ को अमरीकी सहायता जारी रहेगी.

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