इराक़ युद्ध पर पछतावा नहीं: ब्लेयर

टोनी ब्लेयर
Image caption टोनी ब्लेयर से युद्ध के फ़ैसले का बचाव किया

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि इराक़ यु्द्ध ने दुनिया को ज़्यादा सुरक्षित बना दिया है और उन्हें सद्दाम हुसैन के हटाए जाने पर 'कोई पछतावा नहीं है'.

इराक़ युद्ध की जाँच कर रही समिति के सामने टोनी ब्लेयर अपने युद्ध के फ़ैसले को सही ठहराते हुए कहा, "सद्दाम हुसैन एक दानव था और मुझे विश्वास है कि उससे न सिर्फ़ इलाक़े को बल्कि दुनिया भर को ख़तरा था."

उन्होंने कहा कि इराक़ी अब बेहतर स्थिति में हैं और वह आगे भी यही फ़ैसला लेंगे.

जब टोनी ब्लेयर ने छह घंटे तक चली इस कार्यवाही में अपनी बातें समाप्त कीं तो एक जन प्रतिनिधि ने उनके रास्ते में रुकावट खड़ी की.

जब वह गवाही दे कर जाने लगे तो कक्ष में बैठे कुछ जन प्रतिनिधियों ने शोर मचाते हुए भर्त्सना की और दो महिलाओं ने चीख़ेते हुए कहा, "आप झूठे हैं" और "आप हत्यारे हैं".

जाँच समिति के प्रमुख सर जॉन चिल्कॉट ने गवाही के अंत में जब ब्लेयर से पूछा कि उन्हें युद्ध पर कोई खेद है तो ब्लेयर ने कहा कि उन्हें इसलिए 'खेद' है कि यह 'विभाजक' सिद्ध हुई मगर उन्हें विश्वास है कि सद्दाम का हटाया जाना सही था.

'ज़्यादा सुरक्षित'

उन्होंने कहा, "इस ख़तरे से निपटना, उसे सत्ता से निकालना बेहतर था, मुझे पूरा विश्वास है कि अब दुनिया ज़्यादा सुरक्षित है."

उन्होंने जांच आयोग से कहा कि अगर उन्हें नहीं हटाया गया होता तो 'हम देख रहे होते कि इराक़ ईरान के साथ मुक़ाबला कर रहा है और दोनों परमाणु क्षमता के लिए और चरमपंथी गुटों के समर्थन के मामले में प्रतिस्पर्धा में हैं.'

टोनी ब्लेयर ने कहा, "अगर सामूहिक विनाश के हथियार के बनाने की ज़रा भी गुंजाइश नज़र आती है तो उसे रोकने के लिए मैंने जो फ़ैसला लिया, मैं साफ़ तौर पर कहता हूं कि मैं वही फ़ैसला फिर लूंगा."

अपनी गवाही में ब्लेयर ने कहा कि पहले उनकी नीति क़ाबू करने की थी, लेकिन हमले के बाद ख़तरा बढ़ गया.

टोनी ब्लेयर ने इस बात से इनकार किया कि इराक़ पर हमला करने के लिए वर्ष 2002 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से उनका कोई 'गुप्त समझौता' हुआ था.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 में बुश से उनकी निजी मुलाक़ात में जो भी विचार-विमर्श हुआ था, वो छिपी हुई बात नहीं है.

कार्रवाई

Image caption सद्दाम हुसैन को बाद में फाँसी दे दी गई थी

ब्लेयर ने कहा कि उन्होंने जॉर्ज बुश को कहा था, "हमें सद्दाम हुसैन के सामूहिक विनाश के हथियारों से निपटना है और इसका मतलब सत्ता बदलना भी हो, तो हो."

जाँच समिति के प्रमुख सर जॉन चिल्कॉट ने सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू करते हुए कहा कि ये जाँच कोई मुक़दमा नहीं है, लेकिन जिन लोगों ने इराक़ में अपने परिजनों को खोया है, वे जवाब चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि लोग ये जवाब चाहते हैं कि ब्रिटेन इराक़ में सैनिक कार्रवाई को लेकर प्रतिबद्ध क्यों था.

समिति सदस्यों के सवालों के जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने स्पष्ट किया कि 11 सितंबर को अमरीका पर हुए हमले ने सद्दाम हुसैन से ख़तरे के प्रति सोच को बदल दिया.

आरोप

टोनी ब्लेयर ने सद्दाम हुसैन पर 11 सितंबर के हमलों में शामिल होने का कोई आरोप तो नहीं लगाया लेकिन इतना ज़रूर कहा कि रसायनिक, जैविक और परमाणु हथियार के प्रसार से ख़तरा बढ़ गया था.

अपनी गवाही में उन्होंने कहा कि 11 सितंबर के बाद इन सब चीजों को ख़त्म तो करना ही था.

ब्लेयर ने पिछले साल बीबीसी को दिए उस इंटरव्यू से अपने को अलग करने की कोशिश की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उस समय उन्हें यह भी पता चलता कि सद्दाम हुसैन के पास सामूहिक विनाश के हथियार नहीं हैं, तब भी वे सद्दाम हुसैन के हटाए जाने को सही समझते.

इस मामले में जाँच समिति के सामने ब्लेयर ने कहा, "इंटरव्यू के मामले में अपने तमाम अनुभवों के बावजूद इससे यही संकेत मिलता है कि मुझे अब भी कुछ सीखना है."

ब्लेयर ने स्पष्ट किया कि इंटरव्यू में उन्होंने जो भी कहा, उसका मतलब इराक़ युद्ध में शामिल होने के अपने तर्क के आधार को बदलना नहीं था.

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