समलैंगिकों के पक्ष में अमरीकी सेना प्रमुख

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Image caption अभी तक अमरीकी सेना में समलैंगिकों की भर्ती पर पाबंदी है

अमरीकी सेना के सर्वोच्च कमांडर एडमिरल माइक मुलेन का कहना है कि सेना में समलैंगिकों को अपनी पहचान छिपाने की क़ानूनी बाध्यता समाप्त होनी चाहिए.

मुलेन ने इस मामले की सीनेट में चल रही सुनवाई के दौरान कहा कि प्रतिबंध हटाना एक सही काम है जिसे करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि हालांकि इस तथाकथित नीति 'पूछो नहीं, बताओ नहीं' के खंडन में कई व्यावहारिक दिक़्क़तें थीं, लेकिन सेना इसका हल ढूंढ़ने में सक्षम है.

हालांकि माइक मुलेन ने ज़ोर देकर कहा कि ये सिर्फ़ उनका निजी विचार है.

उनका कहना था,''इस मामले को मैं कैसे देखता हूं इससे कोई मतलब नहीं है. लेकिन मैं इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकता हूं कि इस नीति से कितनी व्यावहारिक दिक़्क़तें आती हैं. क्योंकि इससे हमारे युवा साथियों को अपने सहयोगियों के बचाव के लिए झूठ बोलने पर विवश होना पड़ता है.''

उन्होंने सीनेट की सशस्त्र सेना समिति को बताया कि इससे देश की अखंडता प्रभावित होती है व्यक्तिगत रूप से भी और संस्थागत रूप में भी.

ओबामा का आश्वासन

एडम मुलेन की ये टिप्पणी पिछले हफ्ते राष्ट्रपति बराक ओबामा के कांग्रेस के संयुक्त अधिवेशन में दिए गए आश्वासन से मेल खाती हैं.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी इस प्रतिबंध को ख़त्म करने का आश्वासन दिया था.

ओबामा ने कहा था, ''इस वर्ष मैं कांग्रेस और सेना के साथ मिलकर विचार-विमर्श करने के बाद उस क़ानून को अंतिम तौर पर समाप्त करूंगा जो अमरीकी समलैंगिकों को सेना में काम कर देशसेवा करने के उनके अधिकार से वंचित करता है.''

सीनेट की इसी समिति के सामने रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स ने साल भर के भीतर इस नीति की समीक्षा करने की घोषणा की थी.

गेट्स के मुख्य क़ानूनी सलाहकार जेह जॉनसन और यूरोप में अमरीकी सेना के प्रमुख जनरल कार्टर हैम के नेतृत्व में इस नीति की समीक्षा की जाएगी.

रॉबर्ट गेट्स का कहना था, ''हमारे सामने अहम सवाल ये नहीं है कि सेना ये बदलाव कैसे करे बल्कि सवाल ये है कि हम इसे सबसे बढ़िया तरीक़े से कैसे लागू कर सकते हैं.''

1993 में अमरीकी कांग्रेस में पारित क़ानून के मुताबिक सेना में अगर कोई व्यक्ति समलैंगिक आचरण का दोषी पाया गया तो उसे तुरंत बर्ख़ास्त कर दिया जा सकता है.

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