फ़्रांस: बुर्क़े के कारण नागरिकता मना

  • 3 फरवरी 2010
बुर्क़ा
Image caption फ़्रांस की सरकार के अनुसार देश में केवल 1900 महिलाएँ बुर्क़े से पूरा शरीर ढकती हैं.

फ़्रांस की सरकार ने एक विदेशी व्यक्ति को नागरिकता देने से इसलिए इनकार कर दिया है क्योंकि उसने अपनी 'पत्नी को बुर्क़ा पहनने के लिए मजबूर किया.'

इस व्यक्ति की इस समय क्या नागरिकता है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

उसे फ़्रांस में अपनी फ़्रांसीसी पत्नी के साथ बसने के लिए फ़्रांसीसी नागरिकता चाहिए थी.

फ़ांस के आप्रवासी मामलों के मंत्री एरिक बैसन ने कहा कि नागरिकता इसलिए नहीं दी जा रही क्योंकि वो व्यक्ति अपनी पत्नी को अपना चेहरा न ढकने की आज़ादी से वंचित कर रहा था.

ग़ौरतलब है कि पिछले हफ़्ते फ़्रांस की संसदीय समिति ने बुर्क़ा पहनने पर आंशिक प्रतिबंध की सिफ़ारिश की थी.

समिति ने ये सिफ़ारिश भी की थी कि यदि कोई व्यक्ति 'कट्टरपंथी धार्मिक प्रथा' का पालन करने के संकेत देता है तो उसे 'रिज़िडेंस परमिट' और नागरिकता न दी जाए.

'आज़ादी से वंचित किया'

मंत्री एरिक बैसन ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने मंगलवार को एक आदेश के तहत इस व्यक्ति की नागरिकता के आवेदन को ठुकरा दिया. उनका कहना था कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ऐसे सबूत मिले कि उसने अपनी पत्नी को बुर्क़े से अपना शरीर पूरी तरह ढकने का आदेश दिया था.

एरिक बैसन के अनुसार, "इंटरव्यू से पहले और सामान्य जाँच के दौरान ये स्पष्ट हो गया कि ये व्यक्ति अपनी पत्नी को बुर्क़ा पहनने पर मजबूर कर रहा है. इससे उस महिला को बिना चेहरा ढके आने-जाने की आज़ादी से वंचित किया जा रहा था और ये पुरुष-महिला के बीच समानता और धर्मनिरपेक्षता को नकारने के बराबर था."

बाद में मंत्री ने ज़ोर देकर ये भी कहा कि फ़्रांस के क़ानून के मुताबिक यदि कोई नागरिकता चाहता है तो उसे समाज में शामिल होने की मंशा दिखानी होगी.

देश के गृह मंत्रालय के अनुसार वहाँ केवल 1900 महिलाएँ बुर्क़ा पहनती हैं. यूरोप में मुस्लिम समुदाय के सबके अधिक लोग फ़ांस में रहते हैं.

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