हेती में शोक दिवस

हेती
Image caption भूकंप ने शहर को खंडहर बना दिया

हेती में भूकंप के एक महीने बाद आज राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया जा रहा है.

बारह जनवरी को आए इस विध्वंसकारी भूकंप में लगभग दो लाख 30 हज़ार लोग मारे गए थे, लगभग तीन लाख घायल हुए और क़रीब 10 लाख लोग बेघर हो गए.

इस अवसर पर देश भर में प्राथर्ना सभाएं आयोजित की गईं.

देश विदेश में रह रहे हेती के नागरिकों से कहा गया कि स्थानीय समय के अनुसार 4 बज कर 53 मिनट पर भूकंप पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करें.

ठीक इसी समय 12 जनवरी को भूकंप आया था और 45 सेकेंड्स कमे पोर्ट ओ प्रिंस का अधिकतर हिस्सा खंडहर में बदल चुका था, हज़ारों लोग अपने ही घरों, स्कूलों या कार्यालयों के मलबे में दब कर मर गए.

हेती की राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस में तबाह हुए राष्ट्रीय इमारत के खंडहरों के पास भूकंप में मारे गए लोगों की याद में समारोह आयोजित किया गया.

नौत्रे डेम विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति रेनी प्रेवल ने एक प्रार्थना सभा आयोजित की.

लेकिन मुख्य श्रद्धांजलि समारोह उस जगह आयोजित किया गया, जहां समझा जाता है भूकंप ने दसियों हज़ारों लोगों की सामूहिक क़ब्र बना दी.

इसी क़ब्रिस्तान में बीचोंबीच एक प्रार्थना सभा हुई, और लोगों ने अगरबत्तियां जलाईं.

चर्च के पादरी ने शोकाकुल लोगों से कहा कि इन क़ब्रों में सोए न जाने कितने लोग भूंकप की विनाश लीला का शिकार हुए, लेकिन उन्हें भुलाया नहीं जा सकता.

पोर्ट ओ प्रिंस में मौजूद बीबीसी संवादददाता क्रिश्चियन फ्रेज़र का कहना है कि भूकंप के शिकार लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए ही सुबह से ही लोग सफ़ेद वस्त्र पहने प्रार्थना सभाओं में आने लगे थे.

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने उन 10 लाख से भी ज्यादा भूकंप पीड़ितों के लिए अरबों डॉलरों की सहायता भेजी, जो बेघर होने के बाद सड़कों पर आ गए या कामचलाऊ शिविरों में रह रहे हैं.

हालांकि तीन लाख से ज्यादा लोगों को आपात्कालीन शिविरों में भेजा गया और एक लाख से ज्यादा लोगों को भोजन दिया गया लेकिन अभी भी बहुत मदद की ज़रूरत है.

पुनर्निर्माण शुरू कर दिया गया है, मलबे को हटाने के लिए भारी मशीने लगाई गई हैं और सहायता एजेसियां बेघर लोगों के भविष्य के लिए योजनाएं बना रही है.

लेकिन अभी भी सहायता उन लोगों तक पहुंच नहीं पा रही है जिन्हें सबसे ज्यादा ज़रूरत है.

ख़बरें हैं, कि कुछ लोगों ने आने वाले बारिश के मौसम से बचने के लिए टैंटों औऱ कंबलों की मांग करते हुए प्रदर्शन किए.

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