ईसा मसीह की तस्वीर पर विवाद

  • 19 फरवरी 2010
ईसा मसीह
Image caption ईसाई समुदाय के मुताबिक तस्वीर से छेड़छाड़ ईशनिंदा है.

सिगरेट और बीयर के कैन के साथ दिखाई गई ईसा मसीह की तस्वीर वाली पुस्तकों को मेघालय सरकार ने ज़ब्त कर लिया है.

ये पुस्तकें राज्य के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं.

70 फ़ीसदी से ज्यादा ईसाई आबादी वाले इस राज्य में इस ख़बर से सनसनी फैल गई है.

मेघालय के शिक्षामंत्री अंपारीन लिंगदोह ने कहा है कि इन पुस्तकों के प्रकाशकों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

राज्य के शिक्षामंत्री का कहना था कि मेघालय बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के पाठ्यक्रम की निर्धारित पुस्तकों को पढ़ाना निजी स्कूलों के लिए ज़रूरी नहीं है.

लेकिन सरकार ने एहतियातन तुरंत कार्रवाई करके सभी स्कूलों और पुस्तकों की दूकानों से विवादित पुस्तकें ज़ब्त कर ली हैं.

प्रकाशकों की और से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

ईसा मसीह की ये विवादित तस्वीर मेघालय की राजधानी शिलांग के एक निजी स्कूल में जारी एक अभ्यास कक्षा के दौरान सामने आई.

शिलांग के आर्चबिशप डो0मिनिक जाला ने कहा, “प्रकाशकों की संवेदनहीनता से हमें गहरा आघात लगा है. किसी धर्म का कोई इतना अपमान कैसे कर सकता है. ज़रा सोचिए कच्ची उम्र के छात्रों पर इसका क्या असर पड़ेगा.”

कैथलिक चर्च ने स्काई पब्लिकेशंस की सभी पुस्तकों को अपने स्कूलों में प्रतिबंधित कर दिया है.

कैथलिक बिशप्स कौंफ्रेंस ऑफ इंडिया के प्रवक्ता बाबू जोसेफ़ ने कहा, "हमने देश भर में स्थित अपने सभी स्कूलों इस प्रकाशक का बहिष्कार करने को कह दिया है."

बाबू जोसेफ का कहना था कि ईसा मसीह ईसाई विश्वास और ईसाई जीवन शैली का केंद्र हैं और ईसा मसीह की छवि को बिगाड़ने की कोई भी कोशिश बेहद निंदनीय है और भारत के धार्मिक सहिष्णुता के सिद्धांत के ख़िलाफ़ जाती है.

चर्च ने भारत सरकार से अपील की है कि प्रकाशक के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाए जाएं और भविष्य में सभी स्कूलों से इस तरह की विवादित पुस्तकों को हटाया जाए.

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