जलवायु परिवर्तन पैनल ने फिर ग़लती मानी

समुद्र
Image caption नीदरलैंड ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी.

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के पैनल (आईपीसीसी) ने माना है कि नीदरलैंड के डूबने के ख़तरे के बारे में छपी रिपोर्ट में ग़लती थी.

इससे पहले पैनल ने वर्ष 2035 तक हिमालय ग्लेशियर के पिघलने की बात कही थी लेकिन बाद में इसे ग़लत पाए जाने पर रिपोर्ट में बदलाव किया गया था.

ताज़ा मामला नीदरलैंड से जुड़ा है. यूएन पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि नीदरलैंड का 55 फ़ीसदी भू-भाग समुद्र के जलस्तर के नीचे है लेकिन अब इसमें ग़लती मानी गई है.

पैनल ने कहा है कि नीदरलैंड के 55 फ़ीसदी हिस्से के डूबने का ख़तरा है न कि इतना क्षेत्र समुद्र के जलस्तर के नीचे है.

पिछली ग़लती

यूएन पैनल की चर्चित रिपोर्ट वर्ष 2007 में जारी की गई थी.

नीदरलैंड की सरकार ने इस पर आपत्ति जताई और पैनल को बताया कि उसके अध्ययन के मुताबिक सिर्फ़ 26 फ़ीसदी हिस्सा समुद्र के जलस्तर से नीचे है, इसलिए रिपोर्ट पर पुनर्विचार होना चाहिए.

आईपीसीसी ने रविवार को दी गई सूचना में माना कि प्रकाशन में चूक हुई लेकिन आशय यही था कि 55 फ़ीसदी हिस्से के डूबने का ख़तरा है.

इससे पहले ग्लेशियर पिघलने की दर को लेकर छपी रिपोर्ट ग़लत पाए जाने के बाद आईपीसीसी की काफ़ी आलोचना हुई थी और इसके चेयरमैन आरके पचौरी को हटाने की भी माँग हुई थी.

हालाँकि भारत ने रिपोर्ट और आईपीसीसी के चेयरमैन को पूरा समर्थन देने की बात की.

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