ईरान के ख़िलाफ़ कूटनीतिक प्रयास तेज़

Image caption ईरान के ख़िलाफ़ समर्थन जुटाने के लिए हिलेरी क्लिंटन खाड़ी के देशों के दौरे पर हैं

एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी का कहना है कि चीन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने के लिए मनाने की कोशिश की जा रही है.

इधर अमरीकी उपराष्ट्रपति जो बाइडन ने विश्वास व्यक्त किया कि चीन अपने रुख़ में बदलाव लाएगा और नए प्रतिबंधों की घोषणा करेगा.

माना जा रहा है कि सोमवार को इन कूटनीतिक प्रयासों में उस समय तेज़ी आएगी जब अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन सोमवार को सऊदी अरब की यात्रा पर होंगी.

ग़ौरतलब है कि हिलेरी क्लिंटन इन दिनों खाड़ी देशों की यात्रा पर हैं.

उनकी यात्रा का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने के लिए अरब देशों का समर्थन हासिल करना है.

हिलेरी की खाड़ी यात्रा

हिलेरी क्लिंटन की यात्रा में क़तर और तुर्की भी शामिल हैं. तुर्की ईरान पर प्रतिबंधों का विरोध करता है.

इस तीन दिवसीय यात्रा में हिलेरी पहली बार सऊदी अरब का दौरा कर रही हैं.

अमरीका खाड़ी देशों में कूटनीतिक कोशिश से ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है.

अमरीका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ईरान पर चौथे दौर के प्रतिबंध लगाए.

दूसरी ओर ईरान का कहना है कि इसके परमाणु कार्यक्रम का उद्देश्य बिजली उत्पादन है ताकि यह अपने क़ीमती तेल व गैस की ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा निर्यात कर सके.

लेकिन पश्चिमी देशों को संदेह है कि इस बहाने वह अपने परमाणु हथियारों को विकसित करने की कोशिश कर रहा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन को इस बात का डर है कि ईरान में निवेशों से मिलने वाले राजस्व का बड़े पैमाने पर नुक़सान होगा और ईरान से उसे मिलने वाले तेल की आपूर्ति ठप पड़ जाएगी.

उम्मीद की जा रही है कि अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन सऊदी अरब पर इस बात के लिए दबाव डालेंगी कि चीन को अगर तेल की आपूर्ति में बाधा आएगी तो सऊदी अरब इस रूकावट को दूर करेगा.

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