दलाई लामा अमरीका पहुँचे

दलाई लामा
Image caption दलाई लामा अमरीकी राष्ट्रपति से तिब्बत का मसला सुलझाने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध करेंगे

तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा वॉशिंगटन पहुँच गए हैं जहाँ उनकी मुलाक़ात अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से होनी है.

चीन इस मुलाक़ात का विरोध कर रहा है लेकिन अमरीका ने पहले ही दो टूक जवाब देते हुए कहा है कि यह मुलाक़ात अवश्य होगी.

दलाई लामा की मुलाक़ात से पहले ही ताईवान को हथियार बेचने के अमरीकी फ़ैसले और चीन में गूगल के ईमेल को हैक करने के मामले को लेकर चीन और अमरीका के रिश्तों में तनाव दिखता रहा है.

मुलाक़ात

वॉशिंगटन पहुँचने के बाद दलाई लामा सीधे होटल रवाना हो गए जहाँ वे तिब्बतियों के साथ तिब्बती नया साल मनाएँगे.

भारतीय समयानुसार देश शाम उनकी मुलाक़ात बराक ओबामा से होना है.

दलाई लामा की विशेष प्रतिनिधि लोदी गायत्री ने कहा है कि यह 'मुलाक़ात हो रही है यही अपने आपमें महत्वपूर्ण है'.

Image caption बराक ओबामा एक बार दलाई लामा से मुलाक़ात को टाल चुके हैं

उन्होंने कहा, "दलाई लामा अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा से तिब्बत का मसला सुलझाने का अनुरोध करेंगे और यह तिब्बती और चीनी दोनों के लिए फ़ायदेमंद होगा."

इससे पहले पिछले हफ़्ते व्हाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने इस मुलाक़ात के निर्णय का बचाव करते हुए कहा था कि 'दलाई लामा अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त धार्मिक नेता हैं.'

दोनों देशों के संबंधों में तनाव के मुद्दे पर उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच संबंध इतने मज़बूत हैं कि वे असहमत होते हुए भी अंतरराष्ट्रीय मसलों पर सहमत हो सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि दलाई लामा से बराक ओबामा की मुलाक़ात का एक अवसर पिछले साल भी आया था लेकिन तब बराक ओबामा ने इसे टाल दिया था क्योंकि तब वे पहली बार बीजिंग की यात्रा पर जाने वाले थे.

गुरुवार को होने वाली मुलाक़ात व्हाइट हाउस के मैप रूम में होगी न कि भीड़ भरे ओवल ऑफ़िस में, जहाँ राष्ट्रपति विदेशी और विशिष्ट मेहमानों से मिलते हैं.

तनाव

चीन ने दलाई लामा को 'अलगाववादी गुट का नेता' बताते हुए कहा था कि अगर अमरीकी राष्ट्रपति उनसे मिलते हैं तो दोनों देशों के संबंधों पर 'गंभीर असर' पड़ेगा.

संवाददाताओं का कहना है कि चीन नहीं चाहता कि चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ के अप्रैल में प्रस्तावित अमरीका दौरे से पहले ऐसी कोई अप्रिय स्थिति पैदा हो.

हालांकि ऐसा विवाद पहली बार नहीं हो रहा है. इससे पहले जॉर्ज बुश के कार्यकाल में भी दलाई लामा को लेकर ऐसा विवाद हो चुका है.

हाल ही में कई मसलों पर दोनों देशों के बीच विवाद हुआ है.

इसमें सबसे ताज़ा मसला ताइवान को हथियार बेचने की अमरीकी योजना का है, जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

दूसरा अमरीकी इंटरनेट कंपनी गूगल और चीन की सरकार के बीच चल रहा तनाव है. गूगल ने आरोप लगाया है कि चीन में गूगूल मेल को हैक किया जा रहा है, ख़ासकर उन लोगों के जो मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं.

गूगल ने इन शिकायतों के बाद चीन में अपना कारोबार समेटने की धमकी दी थी और अमरीका ने चीन के इस रवैये पर नाराज़गी जताई थी.

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