ब्रिटेन ने इसराइल पर दबाव बढ़ाया

जाली पासपोर्ट
Image caption हमलावरों ने कथित तौर पर यूरोपीय देशों के जाली पासपोर्ट का सहारा लिया था.

दुबई में हमास के वरिष्ठ नेता महमूद अल मबहूह की हत्या के मामले में इसारइल पर यूरोपीय देशों का दबाव बढ़ता जा रहा है.

दरअसल संदिग्ध हमलावरों ने ब्रिटेन, फ्रांस और कुछ अन्य यूरोपीय देशों के फ़र्ज़ी पासपोर्टों का सहारा लिया था. दुबई पुलिस के मुताबिक मबहूह की हत्या इसराइली एजेंसी मोसाद ने करवाई है.

इस ख़बर के बाद ब्रिटेन और आयरलैंड के बाद अब फ़्रांस ने इसराइल से कहा है कि वह फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामले में स्पष्टीकरण दे.

हालाँकि इसराइल ने इस हत्याकांड में किसी तरह की भूमिका से इनकार किया है.

लंदन में ब्रितानी विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने इसराइली राजदूत रॉन प्रोसोर को तलब किया. उन्होंने प्रोसोर से कहा कि इसराइल फ़र्ज़ी पासपोर्टों के मामले की जाँच में मदद करे.

दूसरी ओर इसराइली राजदूत ने कहा कि उनके पास कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं है.

ब्रितानी प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन ने इस मामले की जाँच कराने की घोषणा की थी.

डेविड मिलिबैंड ने कहा कि वह नहीं चाहते कि दुनिया भर में ब्रितानी पासपोर्टों की विश्वसनीयता को लेकर शक पैदा हो.

प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने इस मामले की जांच का आदेश देते हुए कहा है कि जांच की अगुआई गंभीर संगठित अपराध एजेंसी करेगी.

फ़लस्तीनी संगठन हमास ने अपने नेता महमूद अल मबहूह की मौत के लिए इसरायल को दोषी क़रार दिया है लेकिन इसराइल का कहना है कि इसमें इसराइल या मोसाद के शामिल होने के कोई सबूत नहीं हैं.

कोई सबूत नहीं

इसराइल के विदेश मंत्री अविगडोर लिबरमैन ने आर्मी रेडियो के साथ एक बातचीत में कहा है कि दुबई में हुई हमास कमांडर की हत्या में उनकी ख़ुफिया एजेंसी मोसाद के हाथ होने के कोई भी सबूत नहीं हैं.

इसराइल ने हमास नेता की हत्या के मामले में पहली बार बयान दिया है.

20 जनवरी को हमास के प्रमुख नेता महमूद अल मबहूह की दुबई में होटल के कमरे में हत्या कर दी गई थी.

इस मामले पर विवाद के ज़ोर पकड़ने के बाद पहली बार इसराइल की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया आई है. विदेश मंत्री लिबरमैन का कहना था कि इस हत्या में इसराइली ख़ुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ होने के कोई सबूत नहीं हैं.

हालांकि उन्होंने इस बात का खंडन नहीं किया कि इस हत्या में इसराइल का हाथ हो सकता है. उन्होंने इस बारे में पूछे जाने पर ‘ अस्पष्ट और संशयात्मक नीति’ का हवाला दिया.

दुबई के अधिकारियों का मानना है कि मबहूह की हत्या में 11 एजेंटों का हाथ है जिनके पास यूरोपीय पासपोर्ट थे.

इस मामले में विदेशों में पैदा हुए इसराइली नागरिकों के नाम सामने आ रहे है लेकिन इनका कहना है कि उनकी पहचान चुराई गई है और वो इस मामले से नहीं जुड़े हैं.

हमलावरों ने जर्मनी, फ्रांस, आयरिश रिपब्लिक और ब्रिटेन के पासपोर्टों का इस्तेमाल किया था और कहा जा रहा है कि ये सभी पासपोर्ट फ़र्ज़ी थे.

हमास ने मबहूह की हत्या के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराया है और ये बात कई विशेषज्ञ भी मानते हैं क्योंकि पूर्व में मोसाद अपने अभियानों के लिए जाली पासपोर्टों का इस्तेमाल करता रहा है.

हालांकि इसराइली विदेश मंत्री का कहना था कि इस मामले में इसराइल या मोसाद पर शक करने की कोई वजह ही नहीं है.

बीबीसी की मध्य पूर्व संवाददाता कात्या एडलर ने मोसाद के एक पूर्व अधिकारी गैड शिमरॉन के हवाले से कहा है कि मोसाद के एजेंट दूसरों की पहचान के तले काम ज़रुर करते हैं लेकिन इस मामले में इसराइली नागरिकों की पहचान चुराई गई है जो मोसाद का तरीका नहीं प्रतीत होता.

उधर लिबरमैन का कहना था, ‘‘ इसराइल कभी भी इस तरह के मामलों की न तो पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है और न ही जवाब देता है. इसराइल को इस नीति को बदलने की कोई ज़रुरत नहीं है. ’’

आर्मी रेडियो के साथ बातचीत में लिबरमैन ने कहा कि इस मामले में इसराइल या मोसाद पर शक क्यों किया जाए, कोई और ख़ुफिया एजेंसी भी यह काम कर सकती है.

मबहूह की हत्या के मामले में दो फ़लस्तीनियों को भी गिरफ़्तार किया गया है जो इस हत्या के बाद अपना नाम ज़ाहिर किए बिना जार्डन भाग गए थे.

वैसे दुबई के अधिकारियों के अनुसार हमलावर बिल्कुल प्रोफेशनल थे और संभवत उन्हें किसी विदेशी ताकत की मदद प्राप्त थी.