सऊदी अरब में महिला वकीलों को राहत

  • 21 फरवरी 2010
सऊदी अरब की महिलाएं

सउदी अरब में महिलाओं की भूमिका में अब एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है. अभी तक सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और पुरुषों के बीच भेद की परंपरा में कुछ ढील दिखाई पड़ने लगी है.

यहाँ के उलेमाओं ने सुझाव दिया है कि इस्लामी क़ानून यह मांग नहीं करता है कि महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव रखा जाए.

अब सऊदी अरब की सरकार एक ऐसा नया क़ानून लाने की योजना बना रही है, जिसके तहत पहली बार महिला वकीलों को अदालत में मुक़दमें की जिरह करने का अधिकार होगा.

अभी तक वे सिर्फ़ परदे के पीछे पुरुष वकीलों की मदद किया करती थीं.

सऊदी अरब के न्यायमंत्री ने बताया कि महिला वकील अब पारिवारिक मुक़दमों में जज के सामने जिरह कर सकेंगीं जिनमें तलाक़ और माँ-बाप के बीच बच्चों की देखभाल के अधिकार वाले मुक़दमें भी शामिल होंगे.

इस क़ानून का इरादा देश की कानून व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ महिलाओं को उनके व्यवसाय में और ज़्यादा ज़िम्मेदारी देना है.

शाह अब्दुलाह यह प्रयास कर रहे हैं कि महिलाओं के प्रति लोगों के बर्ताव और मानसिकता में बदलाव आए. पिछले साल शाह अब्दुल्लाह ने एक बड़े विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, जिसमें महिला पुरुष दोनों एक साथ पढेंगे.

उन्होंने लोगों को संदेश देने की कोशिश की थी कि सऊदी अरब की जनता की क्षमता का पूर्ण उपयोग करने के लिए ऐसे क़दम ज़रूरी होंगे. लेकिन सऊदी अरब के रूढ़िवादी लोग शक्तिशाली हैं इसलिए ऐसे परिवर्तन लाने के लिए बड़ी समझ-बूझ के साथ काम करना होगा.

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