हत्यारे पहले भी आए थे?

मबहूह,
Image caption पिछले महीने हमास नेता की दुबई में हत्या कर दी गई

संयुक्त अरब अमीरात में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि जिन देशों के नागरिकों को हवाई अड्डों पर कुछ ज़रूरी जांच प्रक्रियाओं से छूट दी गई है, उन्ही देशो के पासपोर्टों का ग़लत इस्तेमाल हुआ.

अमीरात के विदेश मंत्री शेख़ अब्दुल्लाह बिन ज़ियाद ने कहा है कि इन सब के बावजूद, पिछले महीने दुबई में हमास नेता महमूद अल-मबहूह की हत्या के ज़िम्मेदार लोगों की शीघ्र ही शिनाख़्त कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.

अमीरात में तैनात सभी यूरोपीय देशों के राजदूतों को बुला कर उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वे अपने यहाँ के यात्रा दस्तावेज़ का ग़लत इस्तेमाल न होने दें.

वैसे सबकी नज़रें सोमवार को ब्रसेल्स में होने वाले यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों के शिखर सम्मलेन पर लगी हैं जहाँ, समझा जा रहा है कि पासपोर्ट सुरक्षा का मामला प्रमुखता से उठेगा.

साथ ही यह भी माना जा रहा है कि इसराइली विदेश मंत्री को इस मामले में कुछ कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है.

'मोसाद का हाथ'

दुबई के समाचार माध्यमों के मुताबिक़ दुबई पुलिस ने हमास नेता की हत्या में '99 से 100 प्रतिशत' इसराइली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद के शामिल होने की बात कही है. अमीरात के विदेश मंत्री शेख़ अब्दुल्लाह का कहना है, "हम मानते हैं कि विभिन्न देशों के संबंध परस्पर संप्रभुता, आपसी विश्वास और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप होने चाहिए. सभी देशों की तरह हम भी इस मानदंड का पालन करते हैं और औरों से भी यही अपेक्षा रखते हैं .

Image caption दुबई पुलिस का कहना है कि अगर संदिग्ध पहले दुबई आए थे तो एक साल पहले

विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह पुलिस और सुरक्षा सेवाओं के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और उसे यक़ीन है कि जल्द ही मामले की तह तक पहुंचा जा सकेगा. ये भी माना जा रहा है कि हमास नेता के हत्यारों ने जिन पासपोर्टों का इस्तेमाल किया उनमें से कई का इस्तेमाल कम से कम एक बार संयुक्त अरब अमीरात आने के लिए किया जा चुका है. अरबी भाषा के अख़बार 'अमारात अल-यौम' को दिए एक इंटरव्यू में दुबई के पुलिस प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल दाही ख़लफ़ान तमीम ने कहा है कि अंतिम बार कोई संदिग्ध व्यक्ति देश में दाख़िल हुआ है तो वह एक साल पहले था. विश्लेषकों का भी यही मानना है कि हत्या की साज़िश रचने वालों ने जिस तरह इस काम को अंजाम दिया उससे ये साफ़ ज़ाहिर है कि इनमें से कुछ लोग पहले भी एक बार संयुक्त अरब अमीरात ज़रूर आए होंगे. दुबई के गल्फ़ रिसर्च सेंटर के एक वरिष्ठ सलाहकार का कहना है, "इतने बड़े काम को अंजाम देने के लिए इतनी बड़ी टीम का आना मामूली बात नहीं है. यह एक बहुत ही सुनियोजित तरीक़े से तैयार किया गया प्लैन है".

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