एच1बी वीज़ा को लेकर सख़्ती

  • 28 फरवरी 2010
अमरीकी बेरोज़गार
Image caption आर्थिक मंदी की वजह से अमरीका में बेरोज़गारी में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई है

अमरीकी सरकार देश में अस्थाई तौर पर काम करने वाले लोगों से संबंधित नियमों को ज़्यादा सख़्ती से लागू कर रही है जिसके नतीजे में एच-1 बी वीज़ा पर भारत से अमरीका जाने वाले कुछ भारतीय पेशेवरों को भी अमरीका में प्रवेश करने से रोका जा रहा है.

एच-1 बी वीज़ा पर भारत से आए कुछ लोगों को तो एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया है.

अब अमरीका में जो लोग पहले से ही एच-1 बी वीज़ा पर आकर काम कर रहे हैं उनमें हड़कंप मच गई है क्यूंकि इस सख़्ती का असर उन पर भी पड़ रहा है.

इस नए नियम क़ायदों का सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियाँ और अप्रवासन के विषय में काम करने वाले वकील भी विरोध कर रहे है.

यह सारा मामला उस वक़्त शुरू हुआ जब पिछले महीने अमरीकी आप्रवासन विभाग के उप निदेशक डोनल्ड न्यूफ़ेल्ड ने विभाग के सभी कर्मचारियों को एक नोटिस के ज़रिए यह हुक्म दिया कि जो लोग एच-1 बी वीज़ा या अस्थाई काम करने वाले वीज़ा पर अमरीका में काम कर रहे हैं या प्रवेश कर रहे हैं उनकी गहरी छानबीन की जाए.

सख़्ती

इस नोटिस में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि आप्रवासन अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जो लोग एच-1 बी वीज़ा पर अमरीका में काम कर रहे हैं या प्रवेश कर रहे हैं उनको जिस कंपनी ने वीज़ा प्रायोजित किया है उसी कंपनी में यह पेशेवर लोग काम भी कर रहे हैं कि नहीं.

और यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि अगर कोई विदेशी अपने काम करने के वीज़ा पर दर्ज शहर के अलावा किसी और स्थान से प्रवेश करने की कोशिश करे तो उसे प्रवेश करने की इजाज़त न दी जाए.

इन आदेशों के बाद से सभी हवाई अड्डों और अन्य सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है. और खासकर एयरपोर्टों पर एच-1 बी वीज़ा पर आने वाले दक्षिण एशियाई मूल के लोगों पर ज़्यादा नज़र रखी जा रही है.

सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र से जुड़े भारतीय पेशेवर भी हज़ारों की संख्या में एच-1 बी वीज़ा पर आकर अमरीका में काम करते हैं.

ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें भारतीय पेशेवरों को एच-1 बी वीज़ा होने के बावजूद यह कह कर एयरपोर्टों से ही वापस भेज दिया गया है कि वह अपने वीज़ा पर दर्ज शहर के बजाए दूसरे शहर के एयरपोर्ट पर अमरीका में प्रवेश कर रहे हैं.

आपत्ति

अश्विन शर्मा फ़्लोरिडा में आप्रवासन और एच-1 बी वीज़ा से संबंधित मामलों के वकील हैं. उनके बहुत से ग्राहक भारतीय पेशेवर हैं जो इस वीज़ा पर अमरीका आते हैं और ऐसे भारतीय मूल के अमरीकी भी हैं जो एच-1 बी वीज़ा प्रयोजित करने वाली कंपनी चलाते हैं.

Image caption अश्विन शर्मा मानते हैं कि इस सख़्ती को रोका जाना चाहिए

अश्विन शर्मा के भी ग्राहक एयरपोर्टों से वापस भेजे गए हैं.

वे कहते हैं,“एच 1 बी वीज़ा पर आ रहे हमारे बहुत से लोगों को न्यू जर्सी के एयरपोर्ट पर रोक कर कहा गया कि वह अमरीका में प्रवेश नहीं कर सकते क्योंकि वह अपने वीज़ा पर दर्ज शहर से प्रवेश नहीं कर रहे हैं. और उन्हे वापस लौटा दिया गया. यह बहुत ही ग़लत है और इसे रोका जाना चाहिए.”

इस तरह एयरपोर्ट से ही वापस लौटाए जाने के मामलों के सामने आने के बाद सूचना प्रौद्योगिकी के पेशेवरों में और एच 1 बी वीज़ा पर आए अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों में हड़कंप मची हुई है. लोग मारे डर के अपने वीज़ा की अवधि बढ़वाने और नौकरी के लिए कंपनी बदलने के आवेदनों से भी गुरेज़ कर रहे हैं.

और अब बहुत से लोगों ने तो फ़िलहाल अमरीका से बाहर जाना भी टाल दिया है जिससे उन्हें वापस प्रवेश करने में मुश्किल का सामना न करना पड़े.

कई वर्षों से भारतीय पेशेवरों के अप्रवासन के मामलों से ही जुड़े न्यूयॉर्क शहर के एक आप्रवासन मामलों के वकील साइरस मेहता ने कुछ भारतीय पेशेवरों के साथ एयरपोर्टों पर पेश आने वाली मुश्किलों का ज़िक्र करते हुए अपनी वेबसाइट पर लिखा है, “हवाई अड्डों पर जैसे ही अधिकारियों को पता चलता है कि कोई भारतीय पेशेवर एच1बी वीज़ा पर आया है और अपने प्रायोजक के बजाए दूसरी कंपनी में काम करने जा रहा है तो उसके भाग्य का फैसला वहीं हो जाता है. उसे फ़ौरन भारत वापस भेज दिया जाता है. और कई मामलों में तो इन पेशेवरों को जेल की धमकी तक दी गई और यह भी ताने दिए गए कि विदेशी कर्मचारियों को अमरीकी लोगों से अधिक तनख़्वाह क्यों दी जाती है.”

बचाव

लेकिन अमरीकी आप्रवासन विभाग का कहना है कि न्यूफ़ेल्ड मेमो नामक नई नोटिस सिर्फ़ विभाग के कर्मचारियों को यह याद दिलाने के लिए है कि विदेशी पेशेवरों को अमरीका में किन क़ानूनों के तहत किस प्रकार काम करने की इजाज़त दी जाती है और जो सख़्ती बरती जा रही है वह नियम क़ानून के मुताबिक़ है.

अमरीकी आप्रवासन विभाग की प्रवक्ता लुज़ इरज़ाबेल ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए नए मेमो के बारे में कहा,“इस नए मेमो में सिर्फ़ पुराने नियम और क़ानून की याद दिलाई गई है और खासकर एच 1 बी वीज़ा पर अमरीका में प्रवेश करने वाले विदेशियों के काग़ज़ात की जांच की ताकीद की गई है. यह इसलिए किया जा रहा है कि सुनिश्चित किया जा सके कि अमरीका में जो लोग बाहर से काम करने के लिए आ रहे हैं वह वीज़ा की शर्तों का पालन भी कर रहे हैं.”

अमरीकी आप्रवासन विभाग का ज़ोर इस बात पर है कि जब कोई पेशेवर एच 1 बी वीज़ा पर अमरीका आता है तो उसे जिस कंपनी ने प्रायोजित किया हो वह कर्मचारी उसी में काम करे.

लेकिन आम तौर पर जो कंपनी किसी पेशेवर को स्पांसर करती है वह उसे काम करने के लिए किसी अन्य कंपनी में भेज देती है जहां अस्थाई तौर पर खासकर सूचना प्रौद्योगिकी के कर्मचारियों को नए प्रोजेक्ट्स पर काम करना होता है.

यही कारण है कि भारत जैसे देशों से अमरीका आने वाले यह पेशेवर लोग उसी शहर के एयरपोर्टों पर प्रवेश करते हैं जिस शहर में उनको काम करना होता है न कि उस शहर में जहां उनको प्रायोजित करने वाली कंपनी का दफ्तर होता है.

परेशानी

Image caption बेरोज़गारी की वजह से विदेशी कामगारों को लेकर आपत्तियाँ बढ़ी हैं

सिद्वार्थ जेटली एक ऐसी ही कंपनी के मालिक हैं जो एच 1 बी वीज़ा प्रायोजित करती है और भारत से कंप्यूटर इंजीनियरों को अमरीका में अस्थाई नौकरियों के लिए लाती है. इन पेशेवरों को फिर दूसरी कंपनियों में काम करने भेजा जाता है. और यह बहुत सालों से हो रहा है.

लेकिन अब सिद्वार्थ जेटली भी अमरीकी आप्रवासन विभाग के अचानक बदले रवैये से काफ़ी परेशान हैं.

वे कहते हैं, “अधिकारी चाहते हैं कि हम अपने कर्मचारियों को सारा काम खुद ही बांटे और उन पर हमारा ही कंट्रोल रहे, लेकिन ऐसा हो नहीं सकता क्यूंकि हम अपने कर्मचारियों को अपने क्लाइंट के पास भेजते हैं जो उनको काम बांटते हैं . और यह बहुत दिनों से ऐसा ही होता आ रहा है और सरकार को भी अच्छी तरह से पता है कि हमारे क्षेत्र में काम ही ऐसे ही होता है. तो इन्होंने सब कुछ मालूम होने के बावजूद हमें तकलीफ़ देना शुरू कर दिया है.”

अब इस नई सरकारी मुहिम के खिलाफ़ अमरीका में आप्रवासन के मामलों के कई वकील भी आवाज़ उठा रहे हैं.

अमरीका में वकीलों की संस्था अमेरिकन लॉयर्स एसोसिएशन ने सभी वकीलों को इस नए मेमो के बारे में संगठित करना भी शुरू किया है.

उनका कहना है कि इस तरह विदेशों से आने वाले खासकर आईटी क्षेत्र के माहिर पेशेवरों को अमरीका में काम करने का वीज़ा मिलना और भी मुश्किल हो जाएगा.

इन वकीलों को उम्मीद है कि सरकार इस मामले में हो रहे विरोध के बाद विदेशी पेशेवरों से संबंधित मामलों में नियमों में ढील जारी रखेगी.

अब इस नई सख़्ती की एक सबसे बड़ी वजह देश में बढ़ती बेरोज़गारी बताई जा रही है.

ताज़े सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ अमरीका में 80 लाख से भी ज़्यादा लोग पिछले दो सालों में बेरोज़गार हुए हैं. और विदेशियों का अमरीका में आकर नौकरियाँ करना कुछ अमरीकियों को बिलकुल नहीं भा रहा है.

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