देर भी, अंधेर भी...

जेल
Image caption टिम आजीवन कहता रहा कि वह निर्दोष है

यह पता चलने के बाद कि एक व्यक्ति को बलात्कार का ग़लत आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया है, उसे दोषमुक्त क़रार देते हुए सज़ामाफ़ी दे दी गई.

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उस ने व्यक्ति जेल में 13 साल बिताने के बाद 1999 में दम तोड़ दिया था. उसे दमे की शिकायत थी.

टिम कोल को इस आरोप से दोषमुक्त घोषित करते हुए माफ़ करने का फ़ैसला उसकी मौत के दस साल बाद हुआ है.

उसकी माँ ने इस फ़ैसले के बाद कहा है, "मैं जानती हूँ कि मेरा बेटा स्वर्ग में मुस्कुरा रहा है."

मामला

वर्ष 1986 में टिम कोल 20 वर्ष से कुछ अधिक का रहा होगा जब अदालत ने उसे एक छात्रा पर बलात्कार के लिए दोषी पाया.

वह हमेशा कहता रहा कि वह निर्दोष है.

जेल में अस्थमा के दौरे बाद जब उसकी मौत हो गई, उसके कई बरस बाद टिम के परिवार को एक पत्र मिला जिसमें किसी अन्य मामले में सज़ा काट रहे एक व्यक्ति ने उस बलाक्तार की ज़िम्मेदारी ख़ुद स्वीकार की, जिसके लिए टिम को सज़ा हुई थी.

इसके बाद परिवार ने डीएनए टेस्ट करवाने की माँग की.

अब पता चला है कि टिम की मौत के चार वर्ष बाद ही इस व्यक्ति ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.

उसने अदालत के अधिकारियों को पत्र भी भेजे थे लेकिन इस स्वीकारोक्ति का मामला कभी आगे नहीं बढ़ सका.

यह पहली बार है, जब टेक्सस प्रांत में किसी को मरने के बाद दोषमुक्त घोषित किया गया है.

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