महिलाओं के लिए संस्था बनाने की मांग

महिलाएँ
Image caption इस समय महिलाओं पर संयुक्त राष्ट्र की कुछ संस्थाएँ काम करती हैं लेकिन उनका काम बँटा हुआ है

ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया है कि वह अपने वादे के अनुरूप महिलाओं के मुद्दे पर काम करने के लिए एक सुपर-एजेंसी का गठन करे और इसे चलाने के लिए एक प्रभावशाली प्रमुख की नियुक्ति करे.

ये प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में शुरु हुए एक 12 दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत में बोल रहे थे.

इस सम्मेलन में इस बात का आकलन किया जाना है कि महिलाओं के अधिकार को लेकर 15 वर्ष पहले बीजिंग में जिस घोषणा पत्र को स्वीकार किया गया था उस पर कितना अमल हुआ है.

ब्रितानी और दूसरे यूरोपीय अधिकारियों ने कहा है कि अब संयुक्त राष्ट्र को गत सितंबर में सामान्य सभा में पारित किए गए प्रस्ताव पर काम करना चाहिए.

प्रस्ताव है कि एक सुपर-एजेंसी का गठन करने के बाद संयुक्त राष्ट्र की चार संस्थाओं को इसमें मिला दिया जाए, जो महिलाओं से ही जुड़े अन्य विषयों पर काम करती हैं.

कहा गया है कि इसके प्रमुख के रुप में किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व को बिठाया जाएगा.

ब्रिटेन में महिलाओ और समानता मामलों की मंत्री हैरियट हैरमन का कहना है कि प्रस्ताव पारित हुए छह महीने बीत गए लेकिन अभी भी बाधाएँ बची हुइ हैं.

उनका कहना है, "हमें जल्दी ही सहमति बनानी होगी, जिससे कि सितंबर के प्रस्ताव से जो माहौल बना हुआ है वह ख़त्म न हो. हमें इन झूठे तर्कों का जवाब देना होगा कि उत्तर के लोगों ने दक्षिण के लोगों पर कुछ थोपने की कोशिश की है, महिलाएँ तो हर जगह हैं."

यूरोपीय संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि महिलाओं को लेकर एक नई एजेंसी का गठन, संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सुधारों की राजनीति की वजह से पीछे छूट रहा है.

बीबीसी की संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि 1995 में बीजिंग में जब महिलाओं पर काम करने की कार्यसूची तैयार की गई थी लेकिन इस मामले में कुछ काम हुए हैं लेकिन अभी भी बहुत दूर चलना है.

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