कम है महिलाओं की हिस्सेदारी

वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम
Image caption कॉरपॉरेट सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी कम है.

वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम के एक सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया भर की अग्रणी कंपनियों में महिलाओं को वो जगह हासिल नहीं है जो उन्हें मिलनी चाहिए.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि कॉरपॉरेट सेक्टर में लिंग भेद की वजह से महिलाएं अभी तक सीनियर मैनैजमैंट या कंपनी के बोर्ड में जगह बनाने में विफल रही हैं.

रिपोर्ट की सह-लेखिका सादिया ज़हिदी का कहना है. “अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कॉरपॉरेट सेक्टर में लिंग भेद का पता चलना खतरे की घंटी है, कॉरपॉरेट सेक्टर लिंग समानता के लिए कुछ नहीं कर रही है.”

इस समस्या से निपटने के लिए वर्ल्ड इकॉनॉमिक फ़ोरम ने कंपनियो से महिलाओं को शिक्षित करने और उनकी प्रतिभा का उपयोग करने का अनुरोध किया है.

सर्वेक्षण में शामिल 40 फ़ीसदी देशों ने महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए कारगर क़दम उठाने की बात कही.

अध्ययन में पता चला है कि महिलाओं को शीर्ष पद देने में नॉर्वे की कंपनिया सबसे आगे हैं. वहीं महिला सीईओ की संख्या में फिनलैंड 13 फ़ीसदी की हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है जबकि नॉर्वे और तुर्की 12 फ़ीसदी के साथ दूसरे स्थान पर और इटली और ब्राजील 11 फ़ीसदी की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर हैं.

सेवा के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी अच्छी खासी है. इसमें बीमा और वित्तीय क्षेत्र में तक़रीबन 60 फ़ीसदी, पेशेवर क्षेत्र में 56 फ़ीसदी और मीडिया और मनोरंजन उद्योग में 42 फ़ीसदी तक महिलाओं की हिस्सेदारी है.

इस सर्वेक्षण के लिए 20 देशों की 16 कंपनियों के 600 मानव संसाधन के प्रमुख को शामिल किया गया था.

सर्वेक्षण में ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्राज़ील, कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, भारत, जपान, मैक्सिको, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्पेन, स्विटज़रलैंड, तुर्की, इंगलैंड और अमरीका को शामिल किया गया था.

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