सर्वेक्षण: 'इंटरनेट मौलिक अधिकार बने'

  • 7 मार्च 2010
इंटरनेट
Image caption दो दशक में ही पूरी दुनिया इंटरनेट की मुरीद हो गई

महज़ बीस साल में इंटरनेट ने आज वो मुक़ाम हासिल कर लिया है कि दुनिया भर में क़रीब 80 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि इंटरनेट के प्रयोग को उनके मौलिक अधिकार में शामिल कर देना चाहिए.

बीबीसी के एक सर्वेक्षण के अनुसार हर पाँच वयस्क लोगों में से हर चार ये मानते हैं कि उन्हें इंटरनेट के प्रयोग की सुविधा उसी ढंग से मिलनी चाहिए जैसे कि ये उनका मौलिक अधिकार हो.

ये सर्वेक्षण ग्लोब स्कैन सर्वेक्षण एजेंसी के माध्यम से करवाया गया जिसमें दुनिया भर के 26 देशों के कुल 27 हज़ार वयस्क लोगों की इंटरनेट के बारे में राय ली गई.

इनमें आधे क़रीब ऐसे थे जो कि इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते थे, लेकिन ऐसे लोगों में भी 71 प्रतिशत का मानना है कि उन्हें ये सुविधा पाने का मौलिक अधिकार होना चाहिए.

जिन देशों में इंटरनेट के बारे में इस तरह की राय रखने वाले सबसे ज़्यादा थे, उनमें दक्षिण कोरिया (96 प्रतिशत), मेक्सिको (94 प्रतिशत) और चीन (87 प्रतिशत) शामिल हैं.

सर्वेक्षण में शामिल हुए 78 प्रतिशत लोगों का कहना है कि इंटरनेट ने उन्हें बड़ी स्वतंत्रता दी है, 90 प्रतिशत लोग कहते हैं कि ये जानकारी का बहुत बड़ा माध्यम है जबकि क़रीब आधे लोग इसे महज़ मौज- मस्ती का साधन मानते हैं और इंटरनेट पर फेसबुक और माई स्पेस जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर अपना खाली समय बिताते हैं.

भारत और पाकिस्तान

जहाँ तक भारत का सवाल है तो यहां 70 प्रतिशत लोग इंटरनेट को अपने विचारों की अभिव्यक्ति का एक सुरक्षित स्थान मानते हैं.

जबकि 67 प्रतिशत लोग इंटरनेट पर फेसबुक और माई स्पेस जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर समय बिताते हैं.

सर्वेक्षण के मुताबिक इंटरनेट पर इन सोशल साइट्स को लेकर कुछ ऐसा ही उत्साह थाईलैंड, इंडोनेशिया और फ़िलीपींस जैसे एशियाई देशों में भी है.

सर्वेक्षण में एक रोचक तथ्य सामने आया है कि भारत और पाकिस्तान में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोग इंटरनेट को जीवन साथी चुनने का सबसे सुरक्षित स्थान मानते हैं.

भारत और पाकिस्तान में ऐसे लोगों का प्रतिशत 59 है जबकि दुनिया भर में यह राय रखने वाले लोग औसतन 30 प्रतिशत हैं.

भारत में इंटरनेट पर निर्भरता संबंधी राय रखने वालों की संख्या सर्वेक्षण में औसत से कम है और इंटरनेट की पहुंच को मौलिक अधिकार बनाने संबंधी विचार रखने वालों का भी प्रतिशत औसत से कम यानी 61 ही है.

दिलचस्प बात ये है कि इन विचारों में पाकिस्तान और भारत में इंटरनेट के उपयोगकर्ता समान राय रखते हैं.

मतभेद

Image caption इंटरनेट की उपयोगिता पर लोगों की राय अलग-अलग है

सर्वेक्षण में लोगों ने इंटरनेट को अपने विचारों की अभिव्यक्ति का एक बेहतर स्थान बताया. हालांकि इसके पक्ष और विपक्ष में राय रखने वाले लोगों की संख्या लगभग बराबर थी.

इंटरनेट को विचारों की अभिव्यक्ति का सुरक्षित स्थान न मानने वालों में सबसे ज़्यादा लोग जापान में हैं.

सर्वेक्षण से ये भी पता चला है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि इस पर किसी भी देश में किसी भी तरह का सरकारी नियंत्रण नहीं होना चाहिए.

हालांकि कुछ लोग इस संबंध में नकारात्मक विचार भी रखते हैं.

ऐसे लोगों का मानना है कि इंटरनेट धोखाधड़ी, अपसंस्कृति जैसी चीजों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है.

लेकिन ऐसी राय रखने वाले लोगों की संख्या काफ़ी कम यानी 32 प्रतिशत है.

यानी सर्वेक्षण में शामिल ज़्यादातर लोग ऐसे थे जो कि इंटरनेट को एक उपयोगी संसाधन मानने हैं.

सर्वेक्षण में शामिल लोगों से उनकी राय 30 नवंबर 2009 से 7 फरवरी 2010 के बीच या तो सीधे तौर पर या फिर फ़ोन के ज़रिए ली गई.

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