इराक़ में ससंदीय चुनाव, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने मतदाताओं से आग्रह किया है कि वो रविवार के संसदीय चुनाव में बड़ी संख्या में आकर वोट डालें.

टेलीविज़न पर दिए संदेश में उन्होंने कहा कि मतादाताओं की भागीदारी से लोकतंत्र को बढ़ावा मिलेगा.

नूरी अल मलिकी ने कहा, "मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप लोकतंत्र से लाभान्वित हों. आपको मतदान केंद्र तक जाना होगा, चुनावों में सक्रिय होकर हिस्सा लें. आप अपने प्रतिनिधियों को सोच समझ कर चुनें. आने वाला समय बहुत अहम होने वाला है. आप जिसे चुनेगें वो चार साल तक सत्ता में रहेगा."

चुनाव को देखते हुए कड़े सुरक्षा इतंज़ाम किए गए हैं- ईरान के साथ सीमा बंद कर दी गई है और देश भर में सैकड़ों सैनिक तैनात हैं.

सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने और 2003 के हमले के बाद इराक़ में दूसरी बार संसदीय चुनाव हो रहा है.

2005 में हुए चुनाव में नूरी मलिकी प्रधानमंत्री बने थे और शिया पार्टियों का वर्चस्व रहा था. फ़रवरी 2009 में स्थानीय प्रतिनिधी चुनने के लिए मतदान हुआ था.

चुनौतियाँ

इराक़ में चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब वहाँ हिंसा में कमी आई है. पिछले सालों की तुलना में हताहत हुए नागरिकों, इराक़ी और अमरीकी सैनिकों की संख्या काफ़ी कम हुई है.

लेकिन ये भी सच है कि अब भी सैकड़ों लोग हर महीने मारे जा रहे हैं, भ्रष्ट्राचार व्याप्त है और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएँ लोगों के पास नहीं हैं.

325 सदस्यों वाली संसद चुनने के लिए एक करोड़ 90 लाख इराक़ी लोग मतदान कर सकते हैं. करीब दो लाख सैनिक तैनात किए गए हैं.

शनिवार को नजफ़ में हुए कार बम धमाके में कई शिया तीर्थयात्री मारे गए थे. धमाका इमाम अली मस्जिद के बाहर हुआ था.

अमरीकी सेना की प्रस्तावित वापसी से पहले इराक़ में मेलमिलाप की प्रक्रिया के लिए ये चुनाव एक अहम टेस्ट की तरह है.

हिंसा

संवाददाताओं का कहना है कि ऐसा लगता है कि चुनाव के बाद नूरी अल मलिकी शिया गठबंधन का नेतृत्व करेंगे और सत्ता में बने रहेंगे.

इसमें ये बात अहम भूमिका निभाएगी कि क्या मलिकी इराक़ के सुन्नी समुदाय को सरकार के साथ कर पाएँगे और उन्हें ये एहसास दिला पाएँगे कि इराक़ के राजनीतिक भविष्य में उनकी भी हिस्सेदारी है.

जॉर्डन और सिरीया में बसे इराक़ी लोगों की वोट भी चुनाव में अहम भूमिका निभाएगी. करीब 10 सीटों का फ़ैसला इन्हीं वोटों से होगा.

इन लोगों ने शुक्रवार से मतदान करना शुरु कर दिया है. सैनिक, क़ैदी और अस्पतालों के मरीज़ गुरुवार से वोट सकते हैं.

बताया जा रहा है कि काफ़ी लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया- करीब आठ लाख.

चुनाव से पहले इराक़ में हिंसा हुई है और विद्रोहियों ने कहा है कि वो बाधा डालेंगे.

इराक़ में सुरक्षाबलों की छुट्टियों पर अभी रोक लगा दी गई है. गुरुवार को बग़दाद में हुए हमले में कम से कम 14 लोग मारे गए थे जबकि बुधवार को बक़ूबा में हुए आत्मघाती हमले में 30 लोगों की मौत हो गई थी.

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