फ़लस्तीनी क्षेत्रों में नए यहूदी घर

  • 8 मार्च 2010
इसराइली सीमा चौकी
Image caption फ़लस्तीनियों का कहना है कि उन्हें इसराइली सुरक्षा चौकियों की वजह से बहुत मुश्किलें होती हैं

इसराइल ने फ़लस्तीनी क्षेत्र – पश्चिमी तट में स्थित यहूदियों की बस्ती में 112 नए घर बनाने की एक योजना को मंजूरी दी है.

यह मंजूरी ऐसे समय में दी गई है जब अमरीका के उपराष्ट्रपति जो बाइडेन मध्य पूर्व शांति वार्ता में कुछ जान फूँकने के प्रयासों के तहत इस क्षेत्र का दौरा करने वाले हैं.

जब से राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पद संभाला है उसके बाद से उनके प्रशासन के इतने बड़े पदाधिकारी की यह पहली यात्रा होगी.

गत रविवार को ही फ़लस्तीनी प्रशासन ने पश्चिमी तट में इसराइल के साथ परोक्ष बातचीत के लिए सहमति दी थी.

फ़लस्तीनियों की माँग रही है कि इसराइल पहले फ़लस्तीनी क्षेत्रों में यहूदी बस्तियों के विस्तार पर रोक लगाए तभी शांति प्रक्रिया के तहत कोई बातचीत की जा सकती है.

इसराइल ने इस माँग के जवाब में अमरीकी दबाव के तहत नवंबर 2009 में यहूदी बस्तियों के विस्तार पर दस महीने की अस्थाई रोक लगाने की घोषणा की थी लेकिन पूर्वी येरूशलम में ऐसी कोई रोक नहीं लगाई गई थी.

लेकिन इसराइल सरकार ने कहा था कि जिन तीन हज़ार घरों को बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है उसे जारी रखने की इजाज़त होनी चाहिए, इतना ही नहीं, कुछ अन्य तरह के निर्माण कार्य भी इस अस्थाई रोक के दायरे से बाहर रह सकते हैं.

पूर्वी येरूशलम में भी ऐसा फ़लस्तीनी इलाक़ा है जिस पर इसराइल ने 1967 के युद्ध में क़ब्ज़ा किया था.

Image caption रेडक्रॉस का कहना है कि फ़लस्तीनियों का जीवन बहुत मुश्किल हो गया है

इसराइल ने पूर्वी येरूशलम में यहूदी निर्माण कार्य पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. फ़लस्तीनियों का कहना है कि भविष्य में उनका अलग राष्ट्र बनने पर वे पूर्वी येरूशलम को ही राजधानी बनाना चाहते हैं.

इसराइल सरकार ने फ़रवरी 2010 में जानकारी दी थी कि फ़लस्तीनी क्षेत्रों में यहूदी बस्तियों के विस्तार पर अस्थाई रोक लगाने की घोषणा के बावजूद अनेक बस्तियों में निर्माण कार्य जारी रहा है.

फ़लस्तीनी वार्ताकारों का कहना है कि इसराइल ने पश्चिमी तट में 112 नए मकान बनाने की जो यह योजना मंज़ूरी की है, उससे बातचीत के लिए धीरे-धीरे बनती नज़र आ रही सहमति पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

ये नए मकान पश्चिमी तट की बीईतार इल्लित यहूदी बस्ती में बनाए जाएंगे जहाँ की ज़्यादातर आबादी कट्टरपंथी यहूदी हैं.

इसराइली मंत्रियों ने कहा है कि इस तरह की इमारतों का निर्माण जारी रहेगा क्योंकि उनकी नज़र में ऐसा करना ‘सुरक्षा कारणों’ से ज़रूरी है.

इसराइली रक्षा मंत्रालय से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि दो मौजूदा इमारतों के बीच 40 ग़ज़ चौड़ी ख़तरनाक खाई को पाटने के लिए यह नई इमारत बनाया जाना ज़रूरी है जिसमें 112 मकान बनाए जाएंगे.

वक्तव्य में कहा गया है, “बीईतार इल्लित में यह इमारत बनाने के लिए असाधारण परमिट दिया गया है क्योंकि वहाँ के बुनियादी ढाँचे में कुछ सुरक्षा संबंधी समस्याएँ सामने आने के बाद जारी किया गया है.”

इस इमारत को बनाने के परमिट पूर्ववर्ती एहूद ओलमर्ट की सरकार के दौरान जारी किए गए थे. इसराइल के पर्यावरण मंत्री गिलाद अरदान का कहना था कि जिस बस्ती में नए घर बनाए जाएंगे वो निर्माण कार्य पर लगी अस्थाई रोक के दायरे से बाहर है.

मिचेल की यात्रा

उधर मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए अमरीका सरकार के विशेष दूत जॉर्ज मिचेल पहले से ही क्षेत्र की यात्रा कर रहे हैं.

अरब देशों ने इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच अनौपचारिक बातचीत को आगे बढ़ाने के अमरीकी प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई थी और जॉर्ज मिचेल उसी बातचीत में मध्यस्थता करने के लिए मध्य पूर्व में हैं.

फ़लस्तीनी वार्ताकार साएब इरेकात ने कहा है कि इसराइल सरकार ने पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों के विस्तार के तहत जो 112 नए घर बनाने की योजना को मंज़ूरी दी है इससे बातचीत की प्रक्रिया के लिए ख़तरा पैदा हो गया है.

साएब इरेकात का कहना था, “अगर इसराइल सरकार इस तरह के क़दम उठाकर जॉर्ज मिचेल के प्रयासों को प्रभावहीन बनाना चाहती है तो हम मिचेल से बात करना चाहेंगे कि अगर इतनी महंगी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है तो हम हो सकता है कि बातचीत में हिस्सा ही ना लें.”

एक इसराइली संगठन पीस नाउ ने कहा है कि 112 नए घर बनाने की इसराइल सरकार की घोषणा से शांति प्रक्रिया के लिए इसराइल के संकल्प पर सवाल उठ खड़े हुए हैं.

हमास सहित अन्य फ़लस्तीनी संगठनों ने बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है. इनमें से कुछ संगठन सीरिया से अपनी गतिविधियाँ चलाते हैं और फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा पट्टी में हमास की सरकार है.

इन फ़लस्तीनी संगठनों का कहना है कि यह बातचीत दरअसल इसराइल और अमरीका के दबाव के आगे झुकना है.

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