यूरोप में मुसलमानों के साथ भेदभाव

ईरान

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने अपनी ताज़ा मानवाधिकार रिपोर्ट में कहा है कि कई सरकारों ने इंटरनेट का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कम करने के लिए किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में घरेलू स्तर पर विरोध के स्वर को दबाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक संचार के नए रूपों को सीमित किया गया है.

इस विस्तृत रिपोर्ट में चीन में जारी मानवाधिकार हनन और उत्तर कोरिया में क़ानून के संरक्षण में होने वाली हत्याओं का ख़ास तौर पर ज़िक्र किया गया है.

इस रिपोर्ट में ईरान, श्रीलंका, बर्मा और स्विट्ज़रलैंड की भी आलोचना की गई है.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस वार्षिक रिपोर्ट को एक व्यावहारिक और प्रभावी मानवाधिकार रणनीति बनाने की दिशा में अहम साधन बताया है.

अमरीका की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले साल कई सरकारों ने आतंकवाद और अपने आपातकालीन अधिकारों को अपने मतलब से इस्तेमाल करके हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकार सीमित किए और मूल मानवाधिकारों को भी कम किया.

इस रिपोर्ट में इसका भी जिक्र है कि वर्ष 2009 में और ज़्यादा लोगों तक इंटरनेट की पहुँच बढ़ी लेकिन सरकारों ने अपना पैसा, समय और ध्यान इस पर नियंत्रण करने के तरीक़े तलाश करने में लगाया.

रिपोर्ट में चीन की सरकार को आड़े हाथों लिया गया है और संचार साधनों पर अवरोध लगाने के मामले में चीन को शीर्ष देशों में रखा गया है.

नियंत्रण

रिपोर्ट में कहा गया है- चीन की सरकार ने इंटरनेट के इस्तेमाल पर निगरानी, इसकी सामग्रियों पर नियंत्रण, सूचनाओं पर पाबंदी के साथ-साथ विदेशी और घरेलू बेवसाइट्स पर नियंत्रण के लिए कोशिशें तेज़ की हैं.

Image caption स्विट्ज़रलैंड में मीनारों पर लगी पाबंदी का भी उल्लेख है

इसके लिए चीन में हज़ारों लोगों को तैनात किया गया है. रिपोर्ट में ईरान की भी आलोचना की गई है, जिसने फ़ेसबुक और ट्विटर जैसी वेबसाइट पर पाबंदी लगाई.

रिपोर्ट में यूरोपीय देशों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ भेदभाव की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई गई है, तो एलटीटीई के ख़िलाफ़ अभियान में श्रीलंका सरकार की भी आलोचना की गई है और मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया गया है.

रिपोर्ट में बर्मा और क्यूबा को भी आड़े हाथों लिया गया है और कहा गया है कि यहाँ मानवाधिकार उल्लंघन जारी हैं.

बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि मानवाधिकार हनन के मामले में जिन देशों की आलोचना की गई है, वो नया नहीं है.

लेकिन इस रिपोर्ट में यूरोपीय देशों में मुसलमानों के साथ भेदभाव करने की बात नई है. रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर स्विट्ज़रलैंड में मीनारों के निर्माण पर लगी पाबंदी का हवाला दिया गया है.

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