अफ़ग़ानिस्तान में धमाका, छह मरे

तालेबान
Image caption तालेबान चाहते है कि विदेशी सेना अफ़ग़ानिस्तान छोड़ दे.

अफ़ग़ानिस्तान के उरुज़गान प्रांत में शनिवार सुबह एक धमाके में क़रीब छह नागरिक मारे गए और एक ज़ख्मी हो गए.

ये धमाका उस समय हुआ जब नागरिकों को ले जाने वाली सवारी गाड़ी तिरिनकोट इलाके के पास से गुज़र रहीं थी.

तिरिनकोट उरुज़गान प्रांत की राजधानी है.

इस धमाके में रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल किया गया.

चरमपंथी हमलावरों के लिए सड़क पर विस्फोटक लगाकर हमले करना एक आसान तरीका है और इसका इस्तेमाल वे सुरक्षाबलों के दस्तों को निशाना बनाने के लिए करते रहते हैं.

लेकिन कई बार इस तरह के हमलों में आम नागरिक भी निशाना बन जाते हैं.

सुलगते सवाल

वर्ष 2001 में कट्टरवादी तालेबान को सत्ता से हटाने के लिए अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया था.

हमले के बाद तालेबान तो सत्ता से बाहर हो गए पर अफ़ग़ानिस्तान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ जारी सैन्य अभियान से अबतक निकल नहीं सका है.

इस दौरान कई सैनिक और कहीं ज़्यादा तादाद में चरमपंथी मारे गए हैं पर आम आदमी को भी इसकी क़ीमत चुकानी पड़ी है.

लगभग एक दशक से अफ़ग़ानिस्तान से आए दिनों ऐसी घटनाओं की ख़बरें आती रहती हैं जिनमें सैनिक, चरमपंथी या आम नागरिक हिंसा और हमलों के शिकार हो रहे हैं.

बीते कुछ वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई तालेबान लड़ाकों से हथियार डालने और देश के पुनर्निर्माण के प्रयासों में शामिल होने की अपील करते रहें हैं.

लेकिन तालेबान कई बार करज़ई की इस अपीलों को ठुकरा चुका है. तालेबान का कहना है कि विदेशी सेनाओं को पहले अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना होगा, उसके बाद ही वे किसी तरह की सुलह के लिए तैयार होंगे.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में मरने वाले नागरिकों में से क़रीब 70 फ़ीसदी नागरिक ऐसे धमाकों में मारे जाते हैं. वर्ष 2009 में धमाको में मरने वाले नागरिकों की संख्या क़रीब 2400 थी, जो कि वर्ष 2008 से 14 फ़ीसदी ज़्यादा है.

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