अमरीका में साइबर क्राइम बढ़े

Image caption इंटरनेट पर नई-नई तकनीक से धोखेबाज़ अपना शिकार करते हैं

अमरीका में एक नई रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट के ज़रिए धोखाधड़ी और अन्य अपराध के मामलों में पिछले साल 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और दोगुनी रकम का नुक़सान हुआ.

अमरीकी जाँच संस्था फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (एफ़बीआई) के अधीन काम करने वाली संस्था इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि 2008 के मुक़ाबले 2009 में इंटरनेट के ज़रिए करीब 55 करोड़ डॉलर की धोखाधड़ी की गई.

वर्ष 2008 में धोखाधड़ी की रकम कुल 26 करोड़ डॉलर थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब धोखाधड़ी करने वाले इंटरनेट पर नई-नई तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं.

इंटरनेट क्राइम कंप्लेन्ट सेंटर या IC3 नामक संस्था में इंटरनेट पर धोखाधड़ी के शिकार लोगों को अपनी शिकायत दर्ज कराने को कहा जाता है. इस संस्था ने इंटरनेट पर होने वाले कुल 79 प्रकार के अपराधों की सूची भी जारी की हुई है.

दिलचस्प यह है कि धोखाधड़ी के मामलों में एफ़बीआई के नाम का भी इस्तेमाल किया गया है. लगभग 16 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जिनमें धोखेबाज़ों ने एफ़बीआई के साथ अपना नाता जोड़कर लोगों से रकम ऐंठने की कोशिश की.

धोखेबाज़ी के स्टाइल

इंटरनेट क्राइम कंप्लेन्ट सेंटर के डॉनल्ड ब्रेकमैन का कहना है कि इंटरनेट पर असली पहचान नहीं होने का अपराधी तत्व पूरी तरह से फ़ायदा उठा रहे हैं.

वे कहते हैं, "इंटरनेट के पर्दे के पीछे छुपकर धोखाधड़ी करने वाले अब नई-नई और बहुत ही मंझी हुई तकनीकों का प्रयोग करके आम लोगों के साथ छल कर रहे हैं."

धोखेबाज़ इंटरनेट पर ठगी के ऐसे-ऐसे तरीक़े इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके बारे में पाँच साल पहले तक सोचा भी नहीं जा सकता था.

अन्य जो मामले हैं उनमें इंटरनेट पर सामान ख़रीदने और उसके भुगतान और डिलीवरी में धोखाधड़ी, किसी इनाम का लालच देकर रकम ऐंठने और दूसरों की पहचान चुराने के मामले शामिल हैं. 10 प्रतिशत मामले इंटरनेट पर क्रेडिट कार्ड धोखेबाज़ी के भी शामिल हैं.

वर्ष 2009 में इंटरनेट के ज़रिए धोखाधड़ी के कुल तीन लाख 37 हज़ार मामले दर्ज किए गए हैं. इन दर्ज मामलों में शिकायत करने वाले 92 प्रतिशत लोग अमरीकी थे. ख़ासकर कैलिफ़ोर्निया, न्यूयॉर्क और फ़्लोरिडा से ज़्यादा लोगों ने शिकायतें दर्ज कराई.

इसके अलावा इस संस्था में शिकायत दर्ज कराने वालों में कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के नागरिक भी हैं.

एफ़बीआई का कहना है कि इंटरनेट के ज़रिए धोखाधड़ी के मामलों में तेज़ी को देखते हुए लोगों को सावधान करना और उनकी जानकारी बढ़ाना और भी ज़रूरी हो गया है.

एफ़बीआई की साइबर डिविज़न के मुखिया पीटर त्रेहान कहते हैं, "क़ानून लागू करने वाली संस्थाएँ तो ऐसे धोखाधड़ी करने वालों को तभी पकड़ सकती हैं जब व्यापार जगत और आम लोग धोखाधड़ी के मामलों की शिकायतें दर्ज कराएँ. तभी हम लोग इस तरह के अपराध की जांच भी सही ढंग से कर सकेंगे."

इन सभी मामलो में जो धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं उनमें से कुछ को तो लाखों डॉलर का नुक़सान उठाना पड़ा है.

संबंधित समाचार