अमरीका इसराइल संबंधों में कड़वाहट

अमरीका में इसराइली राजदूत माइकल ओरेन
Image caption ओरेन ने कहा कि अमरीका-इसराइल संबंध बहुत मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं

इसराइली मीडिया में ख़बरें आई हैं कि अमरीका में इसराइल के राजदूत माइकल ओरेन ने कहा है कि दोनों देशों के संबंध पिछले क़रीब 35 वर्ष में सबसे ज़्यादा तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं.

इसराइली अधिकारियों ने पिछले सप्ताह फ़लस्तीनी क्षेत्र पूर्वी यरूशलम में यहूदियों के लिए 1600 नए घर बनाने की एक योजना की घोषणा की थी. ये घोषणा उसी समय की गई थी जब अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन मध्य पूर्व क्षेत्र का दौरा कर रहे थे.

इसराइल की इस घोषणा को अमरीका के लिए एक असम्मान की तरह देखा गया है और फ़लस्तीनी नेताओं ने कहा है कि इसराइल के साथ अनौपचारिक बातचीत अब संदेहों से घिर गई है.

इस बीच यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख बैरोनैस ऐश्टॉन ने मध्य पूर्व का दौरा करते हुए कहा है कि पूर्वी येरूशलम में 1600 नए घर यहूदियों के लिए बनाने की इसराइली योजना ने फ़लस्तीनियों के साथ अनौपचारिक बातचीत की संभावना को ख़तरे में डाल दिया है.

यूरोपीय संघ पूर्वी येरूशलम में यहूदी बस्तियाँ बनाने की इसराइली घोषणा की पहले ही निंदा कर चुका है. लेडी ऐश्टन ने सोमवार को काहिरा में अरब लीग के नेताओं के साथ बातचीत में कहा, "यहूदी बस्तियों के मुद्दे पर यूरोपीय संघ का रुख़ स्पष्ट है. ये यहूदी बस्तियाँ ग़ैर-क़ानूनी हैं और शांति प्रक्रिया में एक बाधा खड़ी करती हैं. इनसे दो राष्ट्रों के सिद्धांत के हल के लिए ख़तरा पैदा होता है."

इसराइल सरकार ने इससे पहले अमरीका के साथ संबंधों में तनाव के मुद्दे को बहुत हल्का-फ़ुल्का मामला बताया था.

इसराइली मीडिया में सोमवार को ख़बरें चली हैं कि अमरीका में इसराइली राजदूत माइकल ओरेन ने अमरीका में इसराइली वाणिज्य दूतों के एक सम्मेलन में कहा है, "दोनों देशों के संबंधों में आया यह संकट बहुत गंभीर है और इन संबंधों में हम बहुत ही मुश्किल दौर का सामना कर रहे हैं."

एक इसराइली समाचार एजेंसी येनेट न्यूज़ ने ख़बर दी है कि माइकल ओरेन को गत सप्ताह शुक्रवार को अमरीकी विदेश मंत्रालय में तलब किया गया और इस पूरे मामले पर उन्हें ख़ूब खरी-खोटी सुनाई गई.

मुश्किल दौर

समाचार एजेंसी येनेट न्यूज़ के अनुसार माइकल ओरेन ने कहा है, "अमरीका के साथ इसराइल के संबंध 1975 के बाद सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं."

Image caption बाइडेन को इसराइली घोषणा की निंदा करनी पड़ी थी

1975 में इसराइल और अमरीका के संबंधों में उस समय कड़वाहट आ गई थी जब तत्कालीन अमरीकी विदेश मंत्री हैनरी किसिंजर ने इसराइल के प्रधानमंत्री यित्ज़ाक रॉबिन से यह माँग कर दी थी कि वो सिनाई प्रायद्वीप से अपनी सेनाएँ हटा लें.

सिनाई प्रायद्वीप में इसराइली सेनाओं 1967 के छह दिन चले युद्ध के बाद से ही तैनात थीं. ग़ौरतलब है कि उस युद्ध में इसराइल ने अरब देशों को हरा दिया था और कुछ फ़लस्तीनी क्षेत्रों पर क़ब्ज़ा भी किया था उनमें पूर्वी यरूशलम और पश्चिमी तट इलाक़े भी शामिल हैं.

इसराइली अख़बार हारेट्ज़ ने ख़बर छापी है कि शनिवार को हुए उस सम्मेलन में माइकल ओरेन जो शब्द कहे थे उनके बारे में चार इसराइली वाणिज्य दूतों ने जानकारी दी है.

इन दूतों ने अख़बार को बताया, "माइकल ओरेन उस बातचीत में तनावपूर्ण और निराश नज़र आ रहे थे."

अमरीका में इसराइली दूतों को हिदायत दी गई थी कि वो कांग्रेस के सदस्यों और यहूदी समुदाय के नेताओं के साथ संपर्क बढ़ाकर ये स्पष्ट करने की कोशिश करें कि यहूदी बस्तियाँ बढ़ाने की घोषणा से अमरीका को नाराज़ करने का कोई इरादा नहीं था.

हारेट्ज़ ने ओरेन के हवाले से लिखा है, "ये निर्देश येरूशलम में सबसे उच्च स्तर के अधिकारियों से आए थे."

वाशिंगटन में इसराइली दूतावास ने इस पूरे प्रकरण पर अभी सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतान्याहू ने कहा है कि पूर्वी यरूशलम में बनाई जाने वाली यहूदी बस्तियों से अरबों यानी फ़लस्तीनियों का कोई नुक़सान नहीं हो रहा है.

इसराइली संसद नैसेट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वो शांति वार्ता के पक्षधर हैं. उन्होंने उम्मीद जताई की फ़लस्तीनी नेतृत्व बातचीत के लिए अब कोई नई शर्त नहीं रखेगा.

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