यूरोपीय संघ की ईरान को चेतावनी

बीबीसी फ़ारसी टीवी
Image caption बीबीसी के फ़ारसी प्रसारण भी ईरान की रोक का शिकार हुए

ईरान में बीबीसी समेत कई विदेशी समाचार चैनलों के प्रसारणों पर से रोक हटवाने के लिए यूरोपीय संघ ने ईरान पर दबाव बढ़ा दिया है.

ईरान ने अपने यहां फ्रांस के सैटलाइट के ज़रिए आने वाले विदेशी चैनलों के समाचार प्रसारणों पर रोक लगा रखी है.

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है कि इस ‘अस्वीकार्य स्थिति’ के ख़ात्मे के लिए क़दम उठाए जाएंगे.

वक्तव्य में कहा गया है, “यूरोपीय संघ ईरान सरकार से ये अपील करता है कि सैटलाइट प्रसारणों पर लगी रोक और इंटरनेट से सेंसरशिप हटा कर ये इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप तुरंत बंद करे.”

इसी साल फ़रवरी में दुनिया के तीन बड़े मीडिया संगठनों ने प्रसारण में रुकावट डालने के लिए ईरान की निंदा करते हुए कहा था कि ईरान ने जानबूझ कर ये हस्तक्षेप किया है.

बीबीसी, डॉयचे वेले और वॉयस ऑफ़ अमेरिका ने साझा बयान में कहा है कि ईरान सरकार ने हॉटबर्ड उपग्रह से संचार प्रणाली को जाम कर दिया जिसके ज़रिए यूरोप और मध्य-पूर्व में प्रसारण होता है.

पाबंदी

ईरान के इस क़दम से बीबीसी पर्शियन टेलीविज़न, वॉयस ऑफ़ अमेरिका का टेलीविज़न चैनल और रेडियो फ़ारदा, डॉयचे वेले टेलीविज़न और इसकी रेडियो सेवा के प्रसारण तो बाधित हुए ही साथ ही अंग्रेज़ी के न्यूज़ चैनल बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़ के प्रसारण भी बाधित हुए.

इस मामले के निपटारे के लिए यूरोपीय संघ किस तरह के क़दम उठाएगा ये अभी स्पष्ट नहीं है.

ऐसी संभावना है कि यूरोपीय संघ ईरान में कारोबार कर रही मोबाइल नेटवर्क कंपनी नोकिया सीमैंस पर व्यापारिक पाबंदियां लगा दे.

रिपोर्टों के मुताबिक़ संयुक्त उपक्रम के ज़रिए ईरान में कारोबार कर रही नोकिया सीमैंस ने ईरान सरकार को वह तकनीक बेची जिससे मोबाइल फोन कॉल्स की निगरानी की जा सकती है और सोशल नेटवर्किंग साइट्स को अवरुद्ध किया जा सकता है.

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि नोकिया सीमैंस ने पहले ही यह कह दिया है कि वो ईरान को और सामान नहीं बेचेगी.

इस साल के आरंभ में अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र से ईरान पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था.

लेकिन रूस और चीन ने इतने कड़े प्रतिबंधों को समर्थन देने से इंकार कर दिया था.

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