मोटापे के इलाज में शैवाल मददगार

मोटापा
Image caption शैवाल से हो सकता है मोटापे की समस्या का समाधान

ब्रिटन के शोधकर्ताओं के मुताबिक मोटापे का इलाज सीवीड यानी समुद्री शैवाल से हो सकता है.

शैवाल में पाया जाने वाला एल्जिनेट नाम का फ़ाइबर शरीर में जमा वसा को 75 फ़ीसदी तक कम कर सकता है.

फिलहाल मोटापे को कम करने के लिए बनने वाले विशेष खाद्य पदार्थों यानी 'डायट फूड' में एल्जिनेट फाइबर को मिलाया जा रहा है.

अब कुछ ऐसे परीक्षणों की भी योजना है, जो ये बता पाएंगे कि सामान्य खाद्य पदार्थों में शैवाल के फाइबर को मिलाने से मोटापा कम होता है या नहीं.

न्यूकैसल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के इस दल का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर इयन ब्राउनली का कहना है, “इस परीक्षण से ये अंदाज़ा मिलता है कि अगर शैवाल में उपलब्ध इस प्राकृतिक फाइबर को रोज़मर्रा की खाने की चीज़ों जैसे बिस्कुट, डबलरोटी, दही, वग़ैरह में मिलाएं, तो उनमें मौजूद तीन चौथाई वसा सीधे शरीर से बाहर आ जाएगी”.

ब्राउनली का कहना था, “डबलरोटी में एल्जिनेट मिलाकर जो परीक्षण किए गए हैं, उनके नतीजे बेहद उत्साहवर्धक निकले हैं.”

वैज्ञानिकों ने मोटापा कम करने वाले फाइबर की 60 क़िस्मों का असर जानने के लिए एक ‘कृत्रिम आहार नली’ का इस्तमाल किया.

डॉ ब्राउनली का कहना था, “मोटापा कम करने के कई चमत्कारिक इलाज बताए जाते हैं लेकिन इनमें से कुछ ही दावे ऐसे हैं, जो सही वैज्ञानिक प्रमाण के साथ उनकी विश्वसनीयता को साबित करते हों.”

उनके अनुसार “मोटापे की समस्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है और लोगों के लिए हमेशा किसी डायट फूड पर टिके रहना या प्रतिदिन कसरत करना मुश्किल होता है, लेकिन ताज़ा परीक्षण के आरंभिक नतीजे ये बताते हैं कि एल्जिनेट मोटापे की समस्या का असली समाधान बन सकता है.”

खाने को गाढ़ा बनाने वाले या अधिक दिनों तक टिकाऊ रखने वाले खाद्य पदार्थों में एल्जिनेट को अभी भी मिलाया जा रहा है, लेकिन कम मात्रा में.

ब्रिटन के नेशनल ओबैसिटी फोरम के अध्यक्ष डॉक्टर डेविड हैसलम का कहना है, "मोटापे के इलाज के लिए कई प्रकार की मंहगी दवाएं दी जा रही हैं, लेकिन वे बेअसर साबित होती हैं."

डेविड हैसलम का कहना था, “एल्जिनेट से मोटापे का इलाज संभव लग रहा है लेकिन हम इसकी सिफ़ारिश तभी कर पाएंगे, जब वैज्ञानिक गंभीर परीक्षणों के आधार पर पुख्ता सबूत दें.”

मोटापे पर क़ाबू पाने के लिए शैवाल से इलाज को बाक़ी सभी से बेहतर समझा जा रहा है.

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