गूगल और चीन के बीच विवाद गहराया

  • 23 मार्च 2010
गूगल
Image caption चीन सरकार और गूगल के बीच पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था

इंटरनेट कंपनी गूगल का कहना है कि चीन में रहने वाले उपयोगकर्ताओं को वो हांगकांग से चल रही गूगल वेबसाइट की ओर मोड़ रही है जिस पर कोई सेंसरशिप नहीं होगी.

गूगल का कहना है कि उसने चीनी भाषा के सर्च इंजन को सेंसर करना बंद कर दिया है.

भारी सेंसरशिप से नाराज़ गूगल ने ये क़दम उठाया है.

गूगल के प्रमुख क़ानूनी अधिकारी डेविड ड्रम्मड का कहना था,''चुनौतियों को देखते हुए हांगकांग से गूगल सर्चइंजन को बिना सेंसर के उपलब्ध कराना सबसे तर्कसंगत फ़ैसला है.''

उनका कहना था कि इससे सर्च इंजन थोड़ा धीमा होगा और सर्च के परिणामों में थोड़ी देरी होगी.

उल्लेखनीय है कि इसके पहले चीन के गूगल सर्च इंजन को सेंसर किया जाता था और विवादास्पद विषयों से संबंधित सामग्री उस पर उपलब्ध नहीं होती थी.

विवाद

गूगल ने 2006 में चीन में अपना व्यवसाय फैलाया था. तब आलोचकों ने गूगल पर चीन सरकार से मिलीभगत का आरोप लगाया था.

गूगल ने चीन में सेंसरशिप की बात स्वीकार की थी लेकिन कहा था कि जनहित में उसे चीन में कुछ समझौते करने पड़े हैं.

आलोचनाओं के बाद भी तीन वर्षों तक गूगल ने चीन में अपेक्षाकृत शांतिपूर्वक अपना कारोबार फैलाया.

लेकिन इस साल जनवरी में तब मामला बिगड़ गया जब गूगल को पता चला कि कुछ चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के गूगल खातों पर साइबर हमले किए गए हैं.

इसके बाद चीन सरकार और गूगल के बीच तनातनी शुरू हो गई.

चीन के सरकारी मीडिया ने इंटरनेट कंपनी गूगल पर अमरीका की कठपुतली होने का आरोप लगाया.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के कहा था कि गूगल अमरीकी सरकार और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का एक हथियार है जिसके ज़रिए उन्हें सारी गोपनीय सूचनाएँ मिलती रहती हैं.

चीन सरकार ने गूगल पर ये आरोप भी लगाया है कि वो चीन की संस्कृति और उसके मूल्यों के बीच घुसपैठ की कोशिश कर रहा है.

इससे पहले चीन सरकार ने इंटरनेट कंपनी गूगल को चेतावनी दी थी कि उसे चीनी क़ानूनों और सेसंरशिप के मुतबिक़ चलना होगा, अन्यथा उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

विश्लेषकों का कहना है कि चीन जैसे दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाज़ार से गूगल का बाहर हो जाना दुनिया भर में कंपनी की साख को बुरी तरह नुक़सान पहुंचा सकता है.

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