'विवाह पूर्व यौन संबंध अपराध नहीं'

ख़ुशबू
Image caption ख़ुशबू ने एक इंटरव्यू में कहा था कि विवाह पूर्व यौन संबंध ग़लत नहीं हैं

भारत के सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि अगर कोई महिला और पुरुष बिना विवाह के बंधन में बंधे साथ रहते हैं तो यह कोई अपराध नहीं है.

इससे उन लोगों को बड़ी ख़ुशी होगी जो शादी से पहले यौन संबंध रखने और बिना शादी के साथ साथ रहने की वकालत करते हैं.

सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों के खंडपीठ ने कहा, "अगर कोई दो वयस्क साथ रहना चाहते हैं तो इसमें अपराध कहां हुआ. ये अपराध नहीं हो सकता".

अदालत ने ये भी कहा कि भारत में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जो सहवास या शादी से पहले यौन संबंधों की मनाही करता हो.

अभिनेत्री ख़ुशबू का बयान

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी दक्षिण भारत की जानी मानी अभिनेत्री ख़ुशबू की अपील पर की जो उन्होने अपने विरुद्ध दायर 22 आपराधिक मामलों को ख़ारिज करने के लिए दायर की थी.

वर्ष 2005 में उन्होंने एक पत्रिका को दिए गए बयान में कहा था, "मेरी दृष्टि में विवाह पूर्व यौन संबंध बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसके लिए सारी सावधानियाँ बरतनी चाहिए."

इसी साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा था, "किसी भी पढ़े लिखे युवक के लिए यह उम्मीद करना ठीक नहीं है कि उसकी पत्नी की कौमार्यता सुरक्षित होगी."

ख़ुशबू का यह बयान परंपरागत और रुढ़िवादी भारतीय समाज को नागवार गुज़रा था और कुछ तमिल राष्ट्रवादी राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने इस बयान के विरोध में कई मुक़दमे दायर कर दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समाज जिन गतिविधियों को अनैतिक मानता है वो ज़रूरी नहीं कि अपराध भी हों.

मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन, दीपक वर्मा और बीएस चौहान ने मुक़दमा दायर करने वाले के वकील को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "कृपया बताइए कि अपराध क्या है और किस धारा के अधीन हुआ है".

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ख़ुशबू ने जो भी बयान दिए ये उनकी निजी राय है लेकिन यह कोई अपराध नहीं है.

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