तालेबान के दो नए नेताओं की घोषणा

  • 23 मार्च 2010
तालेबान
Image caption तालेबान के नए नेता सशस्त्र संघर्ष जारी रखने के पक्ष में

अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के नेता मुल्लाह उमर ने अपने सैन्य प्रमुख के पाकिस्तान में पकड़े जाने के बाद दो नए उप नेताओं के नाम घोषित किए हैं.

मुल्लाह अब्दुल ग़नी बरादर के पाकिस्तान में पकड़े जाने के बाद उनका दायित्व अब अब्दुल क़यूम ज़ाकिर और मुल्लाह अख़्तर मोहम्मद मंसूर संभालेंगे.

इस घोषणा का उद्देश्य दुनिया को ये संदेश देना है कि 'एक गिरफ़्तारी से तालेबान आंदोलन को कोई अंतर नहीं पड़ेगा'.

मुल्लाह बरादर को फ़रवरी में कराची में पकड़ा गया था और ये समझा जा रहा था कि तालेबान को इससे गहरा झटका लगेगा.

तालेबान ने पहले तो उनकी गिरफ़्तारी का खंडन किया लेकिन बाद में तालेबान के एक प्रवक्ता ने अफ़ग़ानिस्तान में किसी अज्ञात स्थान से टेलिफ़ोन पर गिरफ़्तारी की ख़बर को सही बताया.

तालेबान के प्रवक्ता ने न्यूज़वीक पत्रिका से कहा, "ऐसी गिरफ़्तारियां हमें अपनी गतिविधियां जारी रखने से नहीं रोक सकतीं".

हाल में समाचार माध्यमों में इस आशय की ख़बरें छपी थीं कि मुल्लाह बरादर अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने के लिए बातचीत के पक्षधर थे और उनकी संयुक्त राष्ट्र के मध्यस्थों से भेंट भी हुई थी.

लेकिन तालेबान के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों नए उप नेता अमरीकी नेतृत्व वाले नेटो बलों से या फिर अफ़ग़ान सरकार से बातचीत करने का विरोध करते हैं और अपना सशस्त्र संघर्ष जारी रखना चाहते हैं.

ग्वांतानामो के बंदी

अब्दुल क़यूम ज़ाकिर और मुल्लाह अख़्तर मोहम्मद मंसूर दोनों को तालेबान की गतिविधियां चलाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में और हज़ारों सैनिक भेज रहा है इसलिए यह साल अफ़ग़ान युद्ध में बड़ा अहम रहेगा.

अब्दुल क़यूम ज़ाकिर अमरीका के ग्वांतानामो बंदी शिविर में रह चुके हैं और उनकी उम्र 30 वर्ष बताई जाती है.

वो तालेबान के युवा लड़ाकों में बहुत लोकप्रिय हैं क्योंकि वो अपने सहयोगियों के साथ लड़ाई में हिस्सा लेने को तैयार रहते हैं.

रिपोर्टों के अनुसार अब्दुल क़यूम ज़ाकिर 2007 तक ग्वांतानामो में रहे और 2008 में उन्हे अफ़ग़ानिस्तान निर्वासित कर दिया गया.

रिहा होते ही वो अपने पुराने सहयोगियों से आ मिले.

उल्लेखनीय है कि तालेबान के जो चरमपंथी ग्वांतानामो शिविर में या अफ़ग़ानिस्तान के बगराम अड्डे में बंदी रह चुके हैं उन्हे उनके साथी बड़े विस्मय से देखते हैं.

जहां अब्दुल क़यूम ज़ाकिर एक मज़बूत कमांडर माने जाते हैं वहीं मुल्लाह अख़्तर मोहम्मद मंसूर पर्दे के पीछे काम करने वाले नेता हैं.

वो 40 के पेटे में बताए जाते हैं और तालेबान के मूल नेतृत्व का हिस्सा रहे हैं.

यह माना जाता है कि वो तालेबान के संचालन तंत्र को संभालने और संगठन के लिए पैसा इकट्ठा करने में बहुत सहायक रहे हैं.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार