अफ़ग़ान-पाक सीमा के लिए आर्थिक पहल

  • 30 मार्च 2010
अफ़ग़ानिस्तान में सेना
Image caption अफ़ग़ान-पाक सीमा पर चरमपंथी बिना रोक-टोक आते-जाते हैं

विकसित देशों के संगठन जी-8 ने अफ़ग़ान-पाक सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए आर्थिक पहल का फ़ैसला किया है.

इस फ़ैसले और योजना की जानकारी जी-8 के विदेश मंत्रियों की कनाडा में हुई एक बैठक दी गई.

इसका मक़सद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर दोनों देशों की बीच व्यापार बढ़ाना और आधारभूत ढांचे को मज़बूत करना है.

जी-8 देशों को उम्मीद है कि इससे इलाक़े में आर्थिक विकास संभव हो सकेगा और स्थानिय स्तर पर रोज़गार में भी बढ़ोतरी होगी.

कनाडा के विदेश मंत्री लॉरेंस कैनन ने ज़ोर देकर कहा कि वैशविक सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता काफ़ी महत्वपूर्ण है.

बीबीसी संवादाताओं का कहना है कि उस इलाक़े में तालेबान और अल-क़ायदा चरमपंथियों की तलाश काफ़ी मुश्किल काम है क्योंकि वे जगह जगह से खुली हुई सीमा पर बिना रोक-टोक आसानी से आर-पार आते जाते रहते हैं.

चिंता

अफ़ग़ानिस्तान और पाक सीमा पर स्थिति में सुधार को लेकर पहले भी चिंताएं जताई जाती रही हैं.

नैटो के एक उच्चस्तरीय कमांडर ने अफ़ग़ानिस्तान में पश्चिमी देशों के प्रयासों को अव्यवस्थित बताते हुए चेतावनी दी थी कि यह युद्ध सिर्फ़ सेना के माध्यम से नहीं जीता जा सकता.

टीका कारों का मानना है कि जी-8 के विदेश मंत्रियों के इस फ़ैसले के पीछे यह कारण भी निहित है.

ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ़्रांस, इटली, जापान, रूस और अमरीका के विदेश मंत्री एक दो-दिवसीय बैठक में हिस्सा ले रहे हैं. यह सम्मेलन क्यूबेक के शहर गाटिनू में हो रही है.

एजेंडे में अन्य मुद्दों में ईरान की प्रमाणु योजना, प्रमाणु विस्तार और चरमपंथियों के ख़तरे शामिल हैं.

रूसी विदेश मंत्री सरजी लावरोव ने एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा शक ज़ाहिर किया है कि अफ़ग़ान-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय चरमपंथी भी मास्को हमलों में शामिल हो सकते हैं.

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