बुर्क़े पर पाबंदी क़ानूनी पेंचों में

फ्रांस में लगभग 2000 मुस्लिम महिलाएँ बुर्क़ा पहनना पसंद करती हैं
Image caption फ्रांस में लगभग 2000 मुस्लिम महिलाएँ बुर्क़ा पहनना पसंद करती हैं

फ्रांस सरकार को सलाह दी गई है कि मुस्लिम महिलाएँ पर्दे के लिए जो बुर्क़ा पहनती हैं उस पर पूरी तरह से पाबंदी लगाना संविधान के तहत शायद पूरी तरह से वैध ना हो.

सरकार को यह सलाह उस परिषद ने दी है जो सरकार को नए क़ानूनों पर सलाह देती है. इस परिषद को स्टेट काउंसिल कहा जाता है.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने कहा है कि वो चाहते हैं कि एक ऐसा नया क़ानून बनाया जाए जो मुस्लिम महिलाओं को बुर्क़ा या नक़ाब पहनने से रोके.

राष्ट्रपति का कहना है कि उनके ख़याल में बुर्क़ा या नक़ाब पहनना फ्रांस की धर्म निर्पेक्ष जीवन शैली से मेल नहीं खाता है.

फ्रास में कोई भी नया क़ानून बनाने से पहले देश के शीर्ष न्यायविदों की राय माँगी जाती है जिन्हें मिलाकर स्टेट काउंसिल बनती है.

स्टेट काउंसिल ने अब अपनी राय उस संभावित क़ानून पर दे दी है जो फ्रांस में बहुत विवादास्पद मुद्दा बन चुका है जिसके तहत बुर्क़ा या नक़ाब पर पाबंदी लगाने की बात कही जा रही है.

राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी कई बार कह चुके हैं कि फ्रांस में महिलाओं के चेहरों को ढका जाना सहन नहीं किया जा सकता और उन्होंने क़ानून के ज़रिए बुर्क़ा या नक़ाब पर पाबंदी लगाने की हिमायत की है.

लेकिन स्टेट काउंसिल ने कहा है कि अगर कोई क़ानून बुर्क़ा या नक़ाब पर सीधे तौर पर पाबंदी लगाने की व्यवस्था की जाती है तो हो सकता है कि वो क़ानून अदालत में मिलने वाली चुनौती के सामने नहीं ठहर सके.

बुनियादी स्वतंत्रता

स्टेट काउंसिल ने इसके बदले कहा है कि अगर बुर्क़ा या नक़ाब पर कुछ सार्वजनिक स्थानों - स्कूल, अस्पताल, अदालतें वग़ैरा में पाबंदी लगाई जाती है तो उसे क़ानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है. काउंसिल का ये भी कहना है कि कुछ स्थानों पर सुरक्षा नियमों के तहत बुर्क़ा पहनने वाली महिलाओं को अपना चेहरा दिखाने को कहा जा सकता है.

स्टेट काउंसिल की यह सलाह किसी आश्चर्य के तौर पर नहीं आई है. बहुत से वकीलों की राय रही है कि महिलाओं को इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि वो क्या पहनना चाहती हैं क्योंकि ऐसा करना उनके बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन कहा जाएगा.

इसीलिए अगर फ्रांस सरकार बुर्क़ा या नक़ाब पर पूरी तरह से पाबंदी लगाती है तो उसे फ्रांस में और यूरोपीय अदालतों में चुनौती अवश्य दी जाएगी जहाँ सरकार शायद अपने क़ानून का बचाव ना कर सके.

फ्रांस सरकार का कहना है कि देश में लगभग सिर्फ़ 2000 महिलाएँ ही बुर्क़ा या नक़ाब पहनती हैं जिसमें पूरा चेहरा छुपा होता है, सिर्फ़ आँखें ही नज़र आती हैं. साथ ही कुछ अन्य लोगों का यह भी मानना है कि महिला को पूरी तरह से ढकने वाला बुर्क़ा फ्रांसीसी समाज में इस्लाम के बढ़ते प्रभाव का संकेत देता है.

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