किर्गिस्तान में विपक्ष का तख़्तापलट का दावा

आगज़नी
Image caption प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के वाहनों में आग लगा दी और लूटपाट की है

मध्य एशिया में स्थित किर्गिस्तान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में खूनखराबे और अनेक लोगों के मारे जाने के बाद विपक्ष ने दावा किया है कि ‘जनता की सरकार’ का गठन हो रहा है.

अराजक स्थिति को देखते हुए फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि देश में कौन सत्ता में है.

विपक्ष के अनुसार प्रधानमंत्री दानियार उसेनोव इस्तीफ़ा देने पर राज़ी हुए हैं लेकिन राष्ट्रपति कुरमानबेक बाकियेव की रज़ामंदी बाक़ी है.

अभी ये नहीं पता चल सका है कि राष्ट्रपति बाकियेव कहां हैं लेकिन रिपोर्टों के अनुसार वो राजधानी बिशकेक छोड़ कर कहीं और चले गए हैं.

देश में बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और विपक्षी नेताओं की गिरफ़्तारी के विरोध में तीन शहरों में प्रदर्शन शुरु हुए थे.

किर्गिस्तान मध्य एशिया में सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण देश है. यहां अमरीकी सैनिकों का एक अड्डा है जहां से अफ़गानिस्तान में उसके सैनिकों को रसद जाती है. वहां रुस का भी एक सैनिक अड्डा है.

अमरीका ने प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि लोगों को क़ानून का पालन करना चाहिए और साथ ही स्पष्ट किया है वो अभी भी मानता है कि देश में सरकार का नियंत्रण है.

रुस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन ने आंदोलन में किसी भी भूमिका से इंकार किया है और कहा है कि यह किर्गिस्तान का घरेलू मसला है और इस मामले में सभी को संयम बरतना चाहिए.

रुस के राष्ट्रपति दीमित्री मेदवेदेव का कहना था कि प्रदर्शन दर्शाते हैं कि लोग वर्तमान सरकार से कितने नाराज़ थे.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के एक प्रवक्ता ने कहा कि वे घायल लोगों की संख्या से हतप्रभ हैं और उन्होंनें दोनों पक्षों के बीच बातचीत की अपील की है.

बिशकेक में देर रात तक गोलीबारी और आगज़नी की ख़बरें आ रही थीं. बिशकेक में बीबीसी के रेयहान देमेत्राय का कहना है कि प्रदर्शनकारी पूरे शहर में लूट मचा रहे हैं.

किर्गिस्तान स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक संघर्ष में 40 लोग मारे गए हैं जबकि 400 से अधिक घायल हैं.

टीवी चैनल पर कब्ज़ा

विपक्ष का कहना है कि मरने वालों की संख्या इससे बहुत अधिक है. विपक्ष ने एक टीवी चैनल पर भी कब्ज़ा कर लिया है और इस चैनल से विपक्षी दल के प्रवक्ता ओमूरबक तेकेबायेव ने कहा कि कम से कम 100 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है.

Image caption पुलिस ने बर्बर तरीके से प्रदर्शनकारियों की पिटाई की जिसके बाद भीड़ उग्र हो गई.

इसी चैनल के ज़रिए विपक्ष ने घोषणा की है वो जनता की सरकार का गठन कर रहे हैं जिसका नेतृत्व पूर्व विदेश मंत्रि रोसा ओटुनबायेवा करेंगी.

ओटुनबायेवा ने अपने भाषण में कहा, "अब शक्ति लोगों की सरकार के हाथ में है. ज़िम्मेदार लोगों को नियुक्त किया गया है और वो जनजीवन सामान्य करने की दिशा में काम कर रहे हैं."

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार विपक्ष के एक नेता ने ख़ुफ़िया विभाग नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी का कार्यभार अपने हाथ में ले लिया है.

उधर विपक्षी दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता गलिना स्क्रिपकिना ने समाचार एजंसी रॉयटर्स से कहा कि राष्ट्रपति ने अभी तक इस्तीफ़ा नहीं दिया है और उन्हें औपचारिक रुप से इस्तीफा़ देना होगा ताकि एक कार्यवाहक सरकार की नियुक्ति हो सके.

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति बाकियेव भी 2005 में ऐसे ही एक आंदोलन के ज़रिए सत्ता में आए थे जिसे ट्यूलिप रिवोल्यूशन का नाम दिया गया था लेकिन बाद में बाकियेव के कई सहयोगियों ने उन पर भ्रष्टाचार और धमकाने का आरोप लगाते हुए उनका साथ छोड़ दिया था.

दो दिन पहले तलास शहर से आंदोलन शुरु हुआ जो धीरे धीरे राजधानी बिसकेक तक पहुंच गया. तलास में शांति स्थापित करने गए गृह मंत्री मोलडोमूसा कोंगातियेव को बुरी तरह से पीटा भी गया है.

कुछ रिपोर्टों के अनुसार कोंगातियेव मारे गए हैं लेकिन अभी इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.

लोगों में भ्रष्टाचार और बढ़ती मंहगाई को लेकर गुस्सा तो था ही साथ ही पिछले कुछ दिनों में विपक्षी नेताओं की गिरफ़्तारी को लेकर भी ख़ासी नाराज़गी थी.

राजधानी में प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन के पास जमा हुए जिसके बाद पुलिस ने आसू गैस और स्टन ग्रेनेड्स का इस्तेमाल कर उन्हें हटाने की की कोशिश की.

भीड़ धीरे धीरे बढ़ती गई और उन्होंने राष्ट्रपति परिसर को पूरी तरह से घेर लिया.

संबंधित समाचार