कमलनाथ के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

बलबीर कौर
Image caption बलबीर कौर समेत बड़ी संख्या में सिखों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया

अमरीका के सरकारी दौरे पर आए भारत के केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ को अमरीकी अदालत में मुक़दमे के साथ-साथ सड़कों पर विरोध प्रदर्शनों को भी झेलना पड़ रहा है.

न्यूयॉर्क में मंगलवार को उन्हें अमरीकी अदालत की ओर से एक सम्मन जारी किया गया जिसमें उनपर भारत में सिख-विरोधी दंगों में हिस्सा लेने का आरोप लगाया गया है.

उन्हें 21 दिनों के अंदर इस अदालती सम्मन का जवाब देना होगा.

कमलनाथ का कहना है कि वह बेकसूर हैं और इस मामले में पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही कोई बयान देंगे.

लेकिन गुरूवार को न्यूयॉर्क में मैक्ग्रॉ हिल के दफ़्तर के सामने अमरीका में रहने वाले बहुत से सिखों ने कमलनाथ के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया.

कमलनाथ मैक्ग्रॉ हिल कंपनी के मुख्यालय में सड़क और अन्य निर्माण कार्यों में विश्व भर में निवेश करने वाले अमरीकी निवेशकों की एक बैठक को संबोधित करने आए थे.

कुछ सिखों द्वारा कमलनाथ के ख़िलाफ़ यह आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने 1984 में सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के रकाबगंज गुरूद्वारे में सिखों को मारने आई 4000 लोगों की भीड़ को हमले के लिए उकसाया.

सिखों का प्रदर्शन

मोहेंदर सिंह ने कमलनाथ के ख़िलाफ़ न्यूयॉर्क की केंद्रीय अदालत में मुक़दमा दायर किया है. मोहिंदर सिंह ने बीबीसी को बताया कि दिल्ली में उनके परिवार के 4 लोगों को बेरहमी से मार दिया गया था.

Image caption मोहेंदर सिंह कहते हैं कि कमलनाथ को सज़ा होनी चाहिए.

मोहेंदर सिंह कहते हैं, मेरे पिताजी और दो चाचा को टुकड़े टुकड़े करके जला कर मार डाला गया. हमारे दादाजी ने इतने सालों से अदालतों के चक्कर लगाए लेकिन हमें इंसाफ़ नहीं मिला. हमने 25 साल तक इंतज़ार किया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. ये लोग ऐसे सुनने वाले नहीं है इसलिए हमे इनको अमरीकी अदालत में घसीटना पड़ा. हम चाहते हैं हमें इंसाफ़ मिले.

इस मुक़दमे में सिखों की ओर से वकील गुरपतवंत पन्नुन का कहना है कि कमलनाथ जैसे लोगों को क़ानून के कटघरे में लाकर सज़ा दिलवाने की हर कोशिश की जाएगी.वकील का कहना है, हमने तय कर लिया है कि सिखों के कत्लेआम के ज़िम्मेदार कमलनाथ जैसे लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा और हम इंसाफ़ लेकर ही दम लेंगे.

इन प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि सन 1984 में हुए सिखों के कत्लेआम को 25 साल हो गए अब इसके दोषियों को सज़ा दी जानी चाहिए.

दिल्ली के दंगों में मारे गए लोगों में जसबीर सिंह के खानदान के 26 लोग भी शामिल थे.

वह कहते हैं,कमलनाथ ने खड़े होकर खुद उग्र भीड़ का नेतृत्व किया था जिसने गुरूद्वारे में सिखों की हत्या करी और गुरूद्वारा रकाबगंज को जलाया. ऐसे कातिलों को मंत्री बनाकर अमरीका भेजकर प्रधानमंत्री क्या संदेश देना चाहते हैं.

जसबीर सिंह कहते हैं कि इतने सालों से विभिन्न आयोगों का गठन किया गया लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ.

अब उनको अमरीका में अदालत से कुछ आस है.

सिख फ़ॉर जसटिस नामक संस्था द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में करीब सौ लोगों ने भाग लिया जिनमें बच्चे, महिलाएं और बूढ़े भी शामिल थे.

बहुत से प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना था कि कमलनाथ जैसे लोगों को जिनपर मासूम लोगों के कत्लेआम का इलज़ाम लगा हो अमरीका में प्रवेश की भी आज्ञा नहीं होनी चाहिए.

न्यूयॉर्क के गुरूद्वारा बाबा मख्खंशाह के अध्यक्ष मास्टर महिंदर सिंह का कहना था कि कमलनाथ जैसे लोगों को तो जेल में होना चाहिए न कि मंत्री पद पर.

वह कहते हैं,भारत सरकार को चाहिए कि कमलनाथ जैसे मंत्री को निकाल बाहर करें और ढंग के लोग ले आएं. ऐसे लोगों के बग़ैर भी मुल्क चल सकता है. कमलनाथ को तो मंत्री पद से हटाकर उनपर मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में महिंदर सिंह ने कहा कि उनके हाथ बंधे हैं वह कुछ नहीं कर सकते.

वह कहते हैं, सरदार मनमोहन सिंह एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी कोई चुनाव नहीं जीता और उनको सारी सरकार को साथ लेकर भी चलना पड़ता है. लेकिन वह गुरूनानक का सिख है और वह भी इस मुददे पर दर्द महसूस करते हैं.

बलबीर कौर भी अपने पूरे परिवार के साथ इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं. कौर कहती हैं कि 25 साल हो गए लेकिन सिखों को इंसाफ़ नहीं मिला.

विरोध के बारे में वह कहती हैं, हम चाहते हैं कि यहां भी सबको मालूम हो कि कमलनाथ जैसे लोग नरसंहार के दोषी हैं और सिखों को इंसाफ़ दिया जाए.

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ भारत में सड़कों और हाईवे के निर्माण में विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से अमरीका और कनाडा का दौरा कर रहे हैं.

1984 के सिख-विरोधी दंगों में दिल्ली शहर में ही करीब 3000 सिखों को मार डाला गया था. उन दंगों को भड़काने के आरोप में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्यों के नाम आए थे और अब उन्हीं में से एक कमलनाथ भी हैं.

सन 2005 में एक जांच आयोग ने कमलनाथ से पूछताछ की थी लेकिन उनके ख़िलाफ़ दंगाईयों को उकसाने के कोई सबूत नहीं मिले थे.

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