रूस-अमरीका के बीच अहम परमाणु समझौता

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति दिमित्रि मेदवेदेव ने प्राग में परमाणु हथियारों में कटौती से संबंधित ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. दोनों ने एक साथ ही हस्ताक्षर किए.

एक साल पहले चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में ही ओबामा ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर अहम भाषण दिया था.

इस समझौते के तहत शीत काल दौर के दोनों प्रतिदंद्वी देशों को पहले से तैनात परमाणु वॉरहेड की संख्या कम करके 1550 तक लानी होगी-पहले की सीमा से 30 फ़ीसदी कम.

इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइलों और बॉम्बर की संख्या भी अब 700 से ज़्यादा नहीं हो सकती. संधि लागू होने के बाद इन प्रावधानों को सात साल के अंदर अमल में लाना होगा.

बराक ओबामा ने कहा है कि ये संधि एक मील का पत्थर है पर साथ ही उनका कहना था कि परमाणु निरस्त्रीकरण की ओर बढ़ने में ये केवल पहला क़दम है. वहीं मेदवेदेव का कहना था कि इस संधि से दुनिया एक ज़्यादा सुरक्षित जगह होगी.

अगर दोनों देशों में इस संधि को मंज़ूरी मिल जाती है तो ये 1991 की स्टार्ट संधि ( स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी) की जगह लेगी जो दिसंबर में ख़त्म हो गई.

परमाणु मिसाइल प्रणाली

इससे पहले रूस के विदेश मंत्री ने कहा था कि ये संधि दोनों देशों के बीच विश्वास के एक नए अध्याय को दर्शाती है.

लेकिन साथ ही उन्होंने आगाह भी किया कि अगर रूस को अमरीकी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली से ख़तरा महसूस होगा तो वो इस संधि से पीछे हट सकता है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पोलैंड और चेक गणराज्य में मिसाइल प्रणाली लगाने की योजना रूस के विरोध के बाद वापस ले ली थी.

रूस के विदेश मंत्री कह चुके हैं कि वो अमरीका की मिसाइल प्रणाली संबंधी गतिविधियों पर नज़र रखेगा.

इससे पहले मंगलवार को ओबामा ने अमरीकी परमाणु रीव्यू जारी किया था. इसके तहत अमरीका पर जैविक, रासायनिक या परंपरागत हथियारों से हमला होने पर जवाब में परमाणु हमला करने के विकल्प को समाप्त किया जाएगा.

साथ ही अमरीका ग़ैर परमाणु शक्ति संपन्न देशों के ख़िलाफ़ किसी सूरत में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा.

हालाँकि राष्ट्रपति ओबामा ने अपवाद के रुप में कुछ देशों को रखा है जिनके लिए बदली हुई रणनीति लागू नहीं होगी. उन्होंने खुल कर ऐसे देशों में ईरान और उत्तर कोरिया का नाम लिया.

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