हिलेरी के अवशेष एवरेस्ट पर नहीं बिखेरे जाएँगे

माउंट एवरैस्ट
Image caption सर एडमंड हिलरी के अवशेष माउंट एवरेस्ट के शिखर पर बिखेरे जाने की योजना थी

विख्यात पर्वतारोही सर एडमंड हिलेरी के अवशेष दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट पर बिखेरने की योजना को रद्द कर दिया गया है.

इससे पहले, रिकॉर्ड 19 बार एवरेस्ट फ़तह करने वाले नेपाल के पर्वतारोही अपा शेरपा ने कहा था कि वे बीसवीं बार माउंट एवरेस्ट को फ़तह करने के अभियान पर जाकर हिलेरी के अवशेष माउंट एवरेस्ट के शिखर पर समर्पित करेंगे.

लेकिन बौद्ध धर्म को मानने वाले लामाओं की इस चेतावनी के बाद कि हिलेरी के अवशेष एवरेस्ट की चोटी पर बिखेरने से कुछ 'अशुभ' हो सकता है, शेरपा ने हिलेरी के अवशेष ले जाने की अपनी योजना को रद्द कर दिया.

शेरपा का कहना है कि हिलेरी के अवशेष अब एवरेस्ट के निकट एक बौद्ध मठ में रखे जाएँगे.

एवरेस्ट के लिए 'अशुभ'

इस क्षेत्र में रहने वाले और बौद्ध धर्म के अनुयायी शेरपाओं के लिए एवरेस्ट बेहद पवित्र है.

सर एडमंड हिलेरी माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाले पहले पर्वतारोही थी. वो 1953 में एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचे थे. वर्ष 2008 में उनके निधन के बाद उनकी अस्थियों का अधिकांश हिस्सा ऑकलैंड बंदरगाह पर छितराया गया था.

हिलेरी के कुछ अस्थि अवशेष शेरपा समुदाय को दे दिए गए थे.

अपा शेरपा ने कहा था कि हिलेरी को सम्मान देने के लिए वे उनके अवशेषों को एवरेस्ट की चोटी पर ले जाना चाहते हैं.

शेरपा के अभियान के आयोजकों का कहना है कि शेरपाओं की समिति और बौद्ध धर्मगुरुओं के इसके ख़िलाफ़ राय देने के बाद इस योजना को रद्द कर दिया गया.

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने आयोजक दावा स्टीवन शेरपा के हवाले से कहा, "पवित्र चोटी पर अवशेष ले जाना अशुभ होगा. इसके अलावा ख़तरा ये भी है कि हिलेरी के अवशेष कहीं दूसरे लोगों के लिए मिसाल न बन जाएँ और वे भी ऐसा ही करने लगें."

कश्मीर में विदेशी पर्वतारोही

इस बीच, भारत प्रशासित कश्मीर के अधिकारियों का कहना है कि विदेशियों को पहली बार राज्य की सौ से अधिक चोटियों पर चढ़ने की अनुमति दी जाएगी.

विदेशी पर्वतारोही काराकोरम और लद्दाख़ क्षेत्र की तीन हज़ार मीटर से आठ हज़ार मीटर ऊंची इन चोटिंयों पर ट्रैकिंग और पर्वतारोहण कर सकेंगे.

अधिकारियों का कहना है कि ये फ़ैसला राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है.

राज्य सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में हिंसा की घटनाओं में लगातार कमी के चलते ये फ़ैसला लिया गया है, लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पिछले कुछ हफ़्तों में सुरक्षा बलों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं.

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